तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद राव ने बुधवार को बीआरएस के विधायक दानम नागेंद्र और कादियम श्रीहरि के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया। भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि दोनों विधायकों ने दल-बदल विरोधी नियमों का उल्लंघन किया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि दोनों विधायकों ने आधिकारिक रूप से पार्टी बदली है। उपलब्ध सामग्री और सुनवाई के दौरान दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई से ठीक एक दिन पहले आया। इससे पहले अध्यक्ष ने इसी तरह के मामलों में आठ अन्य विधायकों को भी क्लीन चिट दी थी।
केटीआर ने फैसले की आलोचना की
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दानम नागेंद्र और कादियम श्रीहरि को क्लीन चिट देना लोकतंत्र पर हमला है। केटीआर ने इसे लोकतंत्र के इतिहास में एक काला दिन बताते हुए कहा कि ऐसे फैसले राजनीतिक दलबदल को बढ़ावा देते हैं और लोगों का संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला सत्ता में बैठे लोगों के फायदे के लिए संवैधानिक सिस्टम का गलत इस्तेमाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस पर सही समय पर जवाब देगी।
दानम नागेंद्र ने किया पलटवार
दानम नागेंद्र ने केटीआर और भाजपा नेताओं पर पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि बीआरएस विधायक दल की हाल की बैठक में उन्हें क्यों शामिल नहीं किया गया। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा और बीआरएस ने मिलकर गलत मेल बनाया, जिससे उनकी संसदीय चुनाव में हार हुई। नागेंद्र ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी अन्य पार्टी की सदस्यता नहीं ली और विधानसभा में बीआरएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी की तरफ से किसी भी व्हिप का पालन नहीं किया गया। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर फैसला उनके खिलाफ भी जाता, तो वह उपचुनाव लड़कर जीतते।

