पटनाः बिहार के नए सम्राट बने सम्राट चौधरी अब अपनी पूरी टीम खड़ी करते ही जनता की नजरों में मूल्यांकन के लिए तैयार हो गए हैं। यह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का सौभाग्य है कि उन्हें 1990 वाला बिहार नहीं मिला है। उन्हें 2025 तक दौड़ी डबल इंजन सरकार की विकास एक्सप्रेस वाला बिहार मिला है। पर सही है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने अभी भी काफी चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का सामना किए बगैर नीतीश कुमार की सुशासन और विकास वाली सरकार की हनक समाप्त होने का खतरा है। जानिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने चुनौतियां का कितना बड़ा पहाड़ खड़ा है। एक एक कर समझते हैं।
ऑपरेशन लंगड़ा और सम्राट
सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनने के पहले से ही चुनौतियों को समझते रहे हैं। और वह उनके उप मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भी दिखा। ऑपरेशन लंगड़ा के नायक के नाम से जाने वाले सम्राट चौधरी ने आते ही अपराधियों पर तिरछी नजर रखी वह भी इस आरोप के बावजूद कि एक खास जाति के ही अपराधियों का एनकाउंटर पुलिस कर रही है। सम्राट चौधरी को आरोपों पर भी नजर रखते इस मिशन ऑपरेशन लंगड़ा को कायम होगा
बुलडोजर बाबा और अतिक्रमण
बिहार के तमाम शहरों यहां तक कि गांव के रोड भी अतिक्रमण के शिकार है। इस अतिक्रमण से मुक्ति सम्राट चौधरी के लिए कम चुनौती भरा नहीं है। पर सम्राट चौधरी की सफलता की कहानी बुलडोजर के रस्ते पूरी की पूरी नहीं उतरेगी। सम्राट चौधरी के सामने बुलडोजर के साथ साथ अतिक्रमण की गिरफ्त में आए लोगों के रिहैबिलिटेशन पर भी नीतियां बना कर सकारात्मक रुख अपनाने की भी चुनौती सामने खड़ी है।
नौकरी-रोजगार का अवसर
सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिहार से पलायन रोकने और ज्यादा से ज्यादा नौकरी के अवसर देने की है। ऐसा इसलिए कि यह घोषणा नीतीश सरकार की है कि प्रति वर्ष एक करोड़ नौकरी/रोजगार देने की है। बिहार सरकार यह समझती है कि सरकारी नौकरी की संभावना काफी कम है। इसके लिए तमाम विभागों को रिक्त पड़े पदों को भरना होगा। रोजगार के अवसर निजी क्षेत्रों में तलाशने होगे।
बिहार को औद्योगिक विकास की पटरी पर उतारना
इस समस्या से जूझने के लिए नीतीश कुमार ने सम्राट के लिए योजनाओं का जाल बिछा दिया है। और वह है बिहार को औद्योगिक विकास की पटरी पर उतारना। मखाना, आम, लीची,मकई,आलू , जा

