नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में इस बार सिर्फ वोट नहीं पड़े, हर वोट पर नजर भी रखी गई। चुनाव आयोग ने दिल्ली के अपने मुख्यालय को एक हाईटेक वॉर रूम में तब्दील कर दिया, जहां से 1400 किलोमीटर दूर बैठकर हर बूथ की गतिविधियों पर पल-पल निगरानी की गई। साफ संदेश था-अब दूरी किसी भी गड़बड़ी की ढाल नहीं बन सकती।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने पहले ही भरोसा दिलाया था- ‘नो डर, नो फ्रॉड, नो चप्पा वोट।’ इसी वादे को जमीन पर उतारने के लिए यह वॉर रूम तैयार किया गया, जो किसी फिल्मी कंट्रोल रूम की तरह दर्जनों स्क्रीन और लाइव फीड से लैस था।
सुबह 6 बजे से ही इस वॉर रूम में हलचल शुरू हो गई थी। 6:30 बजे तक बंगाल के बूथों की लाइव स्ट्रीमिंग स्क्रीन पर दिखाई देने लगी और वरिष्ठ अधिकारी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के साथ सक्रिय हो गए।
ठीक 7 बजे CEC ने प्रवेश कर स्थिति का जायजा लिया और संवेदनशील बूथों को तुरंत चिन्हित किया गया।
यह सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं था, बल्कि हर घंटे एक तय ‘कमांड साइकिल’ के तहत कार्रवाई भी हुई।
सुबह 9 बजे टर्नआउट का विश्लेषण, 10 बजे वेबकास्ट अलर्ट की समीक्षा, 11 बजे रैंडम चेक, दोपहर 12 बजे संवेदनशील क्षेत्रों का ऑडिट-हर घंटे स्थिति पर बारीकी से नजर रखी गई।
दोपहर 1 बजे ग्राउंड रिपोर्ट और लाइव फीड का मिलान किया गया, 2 बजे जरूरत पड़ने पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम को सक्रिय किया गया।
3 बजे अंतिम चरण की वोटिंग पर नजर रखी गई, जबकि 4 बजे मतदान खत्म होने से पहले अंतिम समीक्षा कर हर प्रक्रिया को सुरक्षित किया गया।
चुनावों पर 100% वेबकास्टिंग
इस पूरी व्यवस्था की रीढ़ 100% वेबकास्टिंग थी। बूथों के प्रवेश द्वार पर लगाए गए कैमरे यह सुनिश्चित कर रहे थे कि कोई मतदाता डर या दबाव में न हो। साथ ही, यह भी ध्यान रखा गया कि वोट की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहे-यानी पारदर्शिता और गोपनीयता का संतुलन बनाए रखा गया। चुनाव के दूसरे चरण के दौरान सुबह करीब 10 बजे कुछ जगहों पर झड़प और धमकी की खबरें सामने आईं। लेकिन जैसे ही वॉर रूम में अलर्ट मिला, तुरंत कोलकाता स्थित CEO कार्यालय को सूचना दी गई और मौके पर अधिकारियों को भेजकर स्थिति को काबू में किया गया।

