वॉशिंगटन: ईरान के साथ-साथ पश्चिम एशिया के एक और देश में चल रही लड़ाई जल्द रुक सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया है कि इजरायल और लेबनान के नेता बैठक के लिए तैयार हो गए हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन गुरुवार को अमेरिका में मुलाकात कर सकते हैं। नेतन्याहू और आउन के बीच बैठक एक बड़ी घटना होगी क्योंकि दोनों देशों के शीर्ष नेता बीते तीन दशक से ज्यादा समय से साथ नहीं बैठे हैं। हालांकि अभी हिजबुल्लाह के साथ इजरायल के सीजफायर पर स्पष्टता नहीं दिख रही है।
इजरायली मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, ‘लेबनान और इजरायल के नेताओं के बातचीत हुए 34 साल लंबा समय बीत चुका है लेकिन अब यह होने जा रहा है। दोनों देशों के नेता गुरुवार को साथ बैठेंगे क्योंकि हम लेबनान और इजरायल में शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं।’ इजरायल और लेबनान के बीच कोई कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। दोनों देशों के बीच आखिरी सीधी उच्च-स्तरीय बातचीत साल 1993 में हुई थी।डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणियां ऐसे समय आई है, जब लेबनान और इजरायल में राजनयिक संपर्क लगातार आगे बढ़ा है। मंगलवार को वॉशिंगटन में इजरायली और लेबनानी राजदूतों की बैठक हुई है। दोनों पक्षों के लोग अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मध्यस्थता में युद्धविराम की रूपरेखा बना रहे हैं।एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने कहा है कि लेबनानी सरकार से बात हो रही है लेकिन हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ईरान समर्थित लेबनानी गुट हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जमीन पर लड़ाई चल रही है। हालांकि बीते कुछ दिनों में इजरायल के बेरूत क्षेत्र पर हमले कम हुए हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि इजरायल और लेबनान के बीच सीमा विवाद बहुत गंभीर नहीं है। इनके बातचीत में सुलझ जाने की उम्मीद है। विवाद का एक मुख्य मुद्दा हिजबुल्लाह है। इस गुट के पास महत्वपूर्ण सैन्य शक्ति है और यह लेबनानी सरकार से स्वतंत्र रूप से काम करता है। इस गुट का लेबनान के एक बड़े क्षेत्र पर नियंत्रण है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और हिजबुल्लाह के प्रभुत्व से मुक्त सरकार का गठन से इजरायल की उम्मीद बढ़ी है। लेबनान के वर्तमान नेतृत्व के हिजबुल्लाह को काबू करने का इच्छुक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द किसी पूर्ण शांति समझौते की संभावना नहीं है लेकिन कुछ मामलों पर सहमति बन सकती है।

