तमिलनाडु : तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि कांग्रेस ने एक्टर विजय की पार्टी TVK को समर्थन देकर DMK के साथ धोखा किया है। वे कांग्रेस के इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेंगे।
गुरुवार को चेपॉक-ट्रिपलिकेन निर्वाचन क्षेत्र में एक धन्यवाद सभा को संबोधित करते हुए उदयनिधि ने कहा- चुनाव के बाद कांग्रेस के जितने भी विधायक जीते। वे DMK लीडर से मिलने तक नहीं आए।
इस बीच DMK ने 8 जून को दिल्ली में होने वाली I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक में नहीं जाने का फैसला लिया है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, DMK गठबंधन का हिस्सा थी। चुनाव के बाद कांग्रेस के पांच विधायकों ने TVK को समर्थन दे दिया। इसके बाद DMK और कांग्रेस का करीब 20 साल पुराना गठबंधन टूट गया।
DMK ने लोकसभा में कांग्रेस सांसदों के साथ ना बैठने का फैसला किया। सांसद कनिमोझी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखकर सिटिंग अरेंजमेंट बदलने की मांग की। कनिमोझी ने कहा कि बदलते हालातों में कांग्रेस सांसदों के साथ बैठना उचित नहीं है। लोकसभा में 22 सांसदों वाली DMK, विपक्षी INDIA गठबंधन की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है।
4 जून: विपक्षी गठबंधन की बैठक में नहीं जाएंगे
DMK ने 8 जून को दिल्ली में होने वाली INDIA ब्लॉक की बैठक में जाने से इनकार किया। राहुल, ममता और अखिलेश समेत 15 दलों के नेता इसमें शामिल हो सकते हैं। विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक 23 जून 2023 को पटना में नीतीश कुमार की अगुआई में हुई थी। इसमें 15 दल शामिल हुए थे। बाद में नीतीश भाजपा के साथ आ गए।
INDIA गठबंधन की सत्ताधारी पार्टी DMK तमिलनाडु में और TMC पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में हार गई है। INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में TMC से अलग चुनाव लड़ा था। वहीं तमिलनाडु में रिजल्ट के बाद विजय की पार्टी TVK को समर्थन दिया है। तमिलनाडु में एक्टर विजय ने 2024 में TVK पार्टी बनाई थी। विधानसभा चुनावों TVK ने 108 सीटों पर जीत हासिल की है।
अब पढ़िए कांग्रेस-DMK के बीच दोस्ती से तकरार तक की कहानी…
इंदिरा ने नजदीकी बढ़ाई, राजीव की हत्या के बाद गठबंधन टूटा
1967-1971 में DMK ने पहली बार तमिलनाडु में सत्ता हासिल की। तब कांग्रेस और DMK अलग राजनीतिक ध्रुवों में थे। 1971 में इंदिरा गांधी की कांग्रेस और करुणानिधि की DMK के बीच साझेदारी हुई। दोनों ने लोकसभा चुनाव साथ लड़ा।
1972 में एमजी रामचंद्रन (MGR) ने DMK छोड़कर AIADMK बनाई। इसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बने। 1980 में इंदिरा के नेतृत्व में कांग्रेस और DMK का गठबंधन जारी रहा और दोनों ने लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ लड़े। 1989 में रिश्तों में तनाव बढ़ा। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने DMK पर LTTE के प्रति नरम रुख का आरोप लगाया और गठबंधन टूट गया।
फिर कांग्रेस ने AIADMK से दोस्ती की। 1996 में जीके मूपनार ने कांग्रेस से अलग होकर तमिल मनीला कांग्रेस (TMC) बनाई। DMK-TMC गठबंधन ने तमिलनाडु में बड़ी जीत हासिल की। 1999 में DMK NDA में शामिल हुई और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार का हिस्सा बनी।
2004 में DMK ने NDA छोड़ा, कांग्रेस फिर गठबंधन में
2003-2004 में DMK ने NDA छोड़ दिया। कांग्रेस के साथ फिर से गठबंधन किया। 2004 में कांग्रेस-DMK गठबंधन ने तमिलनाडु की सभी 39 लोकसभा सीटें जीत लीं। UPA के पहले कार्यकाल में सरकार के गठन में DMK अहम सहयोगी बनी। 2009 में दोनों दलों ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा।
2013 में श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर DMK ने UPA सरकार से समर्थन वापस ले लिया। हालांकि कांग्रेस से चुनावी संबंध पूरी तरह नहीं टूटे। फिर 2014 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और DMK अलग-अलग लड़े। दोनों को तमिलनाडु में बड़ा नुकसान हुआ। 2018 में करुणानिधि के निधन के बाद एमके स्टालिन DMK प्रमुख बने। कांग्रेस और DMK फिर करीब आए।
कांग्रेस-DMK गठबंधन ने 2019 में लोकसभा चुनाव साथ लड़ा। गठबंधन ने 39 में से 38 सीटें जीतीं। कांग्रेस को तमिलनाडु से 8 सीटें मिलीं। फिर 2021 में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव साथ लड़ा। DMK सत्ता में लौटी। कांग्रेस को गठबंधन में 18 सीटें मिलीं।
2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव भी साथ लड़ा। चुनाव बाद कांग्रेस ने TVK को समर्थन दे दिया। DMK ने इसे विश्वासघात बताया। लगभग 22 साल पुराना (2004 से लगातार चला आ रहा) कांग्रेस-DMK गठबंधन टूट गया।

