जापान। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या के आरोपी ने मंगलवार को कोर्ट में अपना गुनाह कबूल कर लिया। तीन साल पहले आबे की दिनदहाड़े हत्या हुई थी। इस हत्याकांड ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।
आरोपी तेत्सुया यामागामी (45 वर्षीय) पर हत्या और शस्त्र नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन का आरोप था। उस पर यह आरोप है कि उसने जुलाई 2022 में आबे को उनके भाषण देते समय एक हाथ से बने हथियार का इस्तेमाल करके मार डाला। अदालत में यामागामी ने कहा, ‘सब सच है।’
आरोपी के खिलाफ आज मुकदमा शुरू हुआ। यामागामी उसी समय अदालत में पेश हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाइची से वार्ता के लिए पहुंचे। तकाइची ने ट्रंप के साथ चर्चा में आबे के साथ अपने करीबी संबंधों का जिक्र किया और उन्हें अपना ‘महान मित्र’ बताया।
आबे को मारने के पीछे वजह क्या थी?
यामागामी पर आरोप है कि उसने 2022 में चुनावी भाषण के दौरान हाथ से बनाई गई बंदूक से आबे को गोली मारी। उसकी नाराजगी दक्षिण कोरिया में 1953 में कोरियाई युद्ध के एक साल बाद बने यूनिफिकेशन चर्च से थी। यामागामी का मानना था कि इस चर्च के आबे और अन्य जापानी नेताओं से करीबी संबंध थे। उसने अधिकारियों को बताया कि उसकी मां ने चर्च को बहुत बड़ी राशि दान में दी थी, जिससे उसका परिवार आर्थिक रूप से बर्बादी के कगार पर पहुंच गया।
यूनिफिकेशन चर्च के दुनियाभर में मजबूत राजनीतिक संबंध हैं। उसने जापान में सैकड़ों मुकदमों का सामना किया है। कई परिवारों का आरोप है कि इस चर्च ने लोगों को उनके बचत को दान देने के लिए प्रभावित किया। हालांकि, दशकों तक यह चर्च किसी बड़ी सरकारी जांच के दायरे में नहीं आया और जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ इसके करीबी संबंध बने रहे।
सबसे लंबे समय तक पीएम रहे आबे
आबे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे। ट्रंप और तकाइची दोनों ने उन्हें याद किया। समाचार एजेंसी ‘क्योदो’ के मुताबिक, नारा शहर में चल रहे इस मुकदमे के दिसंबर के मध्य तक समाप्त होने की आशंका है।

