बोस्टन। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक विजिटिंग प्रोफेसर कार्लोस पुर्तगाल गुवेआ को वीजा रद्द होने के बाद अमेरिका छोड़ना पड़ा है। ब्राजील मूल के गुवेआ ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने अपने घर के पास चूहे मारने के लिए पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। यह घटना योम किप्पुर (यहूदी समुदाय का पर्व) के दिन एक सिनेगॉग के पास हुई थी, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया। अमेरिकी आव्रजन विभाग ने बुधवार को कार्लोस को हिरासत में लिया। अधिकारियों के मुताबिक, गुवेआ निर्वासन का सामना करने के बजाय स्वेच्छा से अमेरिका से निकलने पर राजी हो गए। उनके वकील ने बताया कि वह गुरुवार को ब्राजील पहुंच गए।
इसके बावजूद, अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने इस घटना को यहूदी-विरोधी कृत्य बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। विभाग की सहायक सचिव ट्रिशिया मैक्लॉफलिन ने कहा कि अमेरिका में काम करना और पढ़ाई करना एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसे हिंसक यहूदी-विरोधी कृत्यों के लिए देश में कोई स्थान नहीं है।
ब्रुकलाइन पुलिस के मुताबिक, घटना एक अक्तूबर की रात करीब नौ बजे हुई, जब योम किप्पुर के चलते सिनेगॉग में प्रार्थना चल रही थी। सुरक्षा गार्डों ने दो तेज आवाजें सुनीं और गुवेआ को एक पेड़ के पीछे बंदूक लिए खड़ा देखा। पुलिस के पहुंचने पर प्रोफेसर और एक अधिकारी के बीच हल्की झड़प भी हुई। हालांकि बाद में गुवेआ को काबू में कर लिया गया।
अमेरिकी विदेश विभाग ने 16 अक्तूबर को गुवेआ का जे-1 वीजा रद्द कर दिया था। हार्वर्ड लॉ स्कूल की वेबसाइट पर उन्हें 2025 सेमेस्टर के लिए विजिटिंग प्रोफेसर बताया गया है। वह ‘भ्रष्टाचार और असमानता सेमिनार’ तथा ‘सतत पूंजीवाद’ जैसे पाठ्यक्रम पढ़ा रहे थे। वह साओ पाउलो विश्वविद्यालय के लॉ स्कूल में सहायक प्रोफेसर और ब्राजील स्थित ग्लोबल लॉ इंस्टीट्यूट के सीईओ भी हैं। हार्वर्ड ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल के निदेशक सेल्सो कैंपिलोंगो ने गुवेआ का समर्थन करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप भ्रामक हैं और उन्होंने हमेशा मानवाधिकारों तथा यहूदी समुदाय के हितों का साथ दिया है।

