रियाद : सऊदी अरब ने यमन के महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मुकल्ला पर बमबारी की है। सऊदी अरब का कहना है कि यह हमला इसलिए किया गया क्योंकि वहां अलगाववादी समूह साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीएस) के लिए हथियार पहुंचाए जा रहे थे, जो यूएई से आए थे। यमन में अलगाववादी समूह और सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। सऊदी अरब और उसके सहयोगी अक्सर यमन में अलगाववादी या विद्रोही समूहों पर हमले करते रहे हैं। ऐसे में सऊदी अरब ने इस हमले का मकसद यह बताया गया है कि हथियारों की सप्लाई रोककर यमन में शांति बनाए रखना और अलगाववादी ताकतों को कमजोर करना।
इस हमले से सऊदी अरब और यूएई के बीच रिश्तों पर दबाव बढ़ गया है। दोनों देश यमन में अलग-अलग समूहों का समर्थन कर रहे हैं और उनके बीच आपस में ही प्रतिस्पर्धा चल रही है। बता दें कि मुकल्ला यमन के हद्रामाउट प्रांत में है और यह आदेन से लगभग 480 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। हाल ही में अलगाववादी समूह ने इस इलाके पर नियंत्रण कर लिया है।
मीडिया रिपोर्टस में इस बात का भी दावा किया गया कि इससे पहले सऊदी अरब ने शुक्रवार को इसी समूह पर हवाई हमले किए थे, ताकि वे प्रांतों से अपने सैनिक पीछे हटाएं। वहीं दूसरी ओर अलगाववादी समूह ने दक्षिण यमन का झंडा फहराना शुरू कर दिया है। दक्षिण यमन कभी 1967-1990 तक अलग देश था। वहां लोग फिर से अलगाव की मांग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि सऊदी अरब और यूएई दोनों ही यमन और अन्य क्षेत्रों में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में हैं, लेकिन अक्सर अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ रहा है। ऐसे में इस घटना के बाद यमन में हिंसा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ सकते हैं, जबकि सऊदी अरब और यूएई के बीच भी संबंधों में खिंचाव दिख रहा है।

