नई दिल्ली : देश में सिलिंडर को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी अफरा-तफरी के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। एलपीजी सिलिंडर बुकिंग 88.8 लाख से घटकर 77 लाख रह गई है, जो स्थिति में सुधार का संकेत है। सरकार ने दोहराया कि देशभर में पेट्रोल, डीजल या खाना पकाने की गैस की कोई कमी नहीं है। पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। सरकार ने लोगों को सलाह भी दी कि वे घबराहट में खरीदारी ना करें।
नियंत्रण कक्ष स्थापित, वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति
22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने स्थिति पर नजर रखने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव कम करने के लिए आतिथ्य और रेस्तरां सहित कुछ क्षेत्रों में केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करने की अनुमति दे दी गई है।
कालाबाजारी रोकने के लिए किए जा रहे उपाय
सरकार ने यह भी बताया कि राज्य सरकारें पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रवर्तन उपाय कर रही हैं। एलपीजी सिलिंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए आंध्र प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है।
सभी भारतीय नाविक सुरक्षित
सरकार ने कहा कि भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय किए गए हैं। सुचारु समुद्री संचालन को सुनिश्चित करने के लिए जहाजरानी अधिकारियों और उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। इस क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी जहाज संबंधी घटना सामने नहीं आई है।
पेट्रोल-डीजल न हों महंगे, डाला जा सकता है रिफाइनरियों पर बोझ
सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां (ओएमसी) ईंधन की खुदरा कीमतें स्थिर रहने के कारण बढ़ते घाटे को नियंत्रित करने के लिए रिफाइनरियों पर वित्तीय बोझ डालने पर विचार कर रही हैं। दरअसल, विपणन कंपनियां कच्चे तेल को शोधित करने वाली कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की आयातित दरों से कम कीमत देना चाहती हैं। इससे एमआरपीएल, सीपीसीएल और एचएमएल जैसी एकल रिफाइनरी कंपनियों पर बुरा असर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। हालांकि, भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को इस बढ़ोतरी का बोझ खुद उठाना पड़ रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि ओएमसी अब रिफाइनरी हस्तांतरण शुल्क (आरटीपी) पर रोक लगाने या उस पर छूट तय करने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। आरटीपी वह आंतरिक कीमत होती है, जिस पर रिफाइनरियां अपने विपणन खंड को ईंधन बेचती हैं। इस कदम का मकसद रिफाइनरियों को पेट्रोल और डीजल की आयात क्षमता लागत से कम भुगतान करना है।

