वॉशिंगटन: अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने और ईरान के तेल निर्यात बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए अब सीधी कार्रवाई की तैयारी में है। इसके लिए अमेरिका ने मध्य पूर्व में भारी संख्या में सैनिकों, युद्धपोतों और पनडुब्बियों को तैनात किया है। ऐसे में आशंका जताया जा रहा है कि अमेरिका फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जे के लिए जमीनी हमला कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को 48 घंटे की चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के आवागमन के लिए पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे, विशेष रूप से उसके पावर प्लांट्स पर हमला करेगा।वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 4,500 अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन की एक टुकड़ी को इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है, जिसमें हेलीकॉप्टर, F-35 लड़ाकू विमान और बख्तरबंद लैंडिंग वाहनों द्वारा समर्थित एक इन्फैंट्री बटालियन लैंडिंग टीम शामिल है। अमेरिका ने सैन डिएगो से 11वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट जैसी ही एक और टुकड़ी को मध्य पूर्व में तैनात किया है। इस कदम को ईरान के खिलाफ जमीनी हमले की क्षमता को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।रिपोर्ट में एक इजरायली अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि मध्य पूर्व में अमेरिका की यह तैनाती एक स्पष्ट ऑपरेशनल उद्देश्यों को पूरा करने के लिए की गई है। इजरायली अधिकारी ने कहा, “ये मरीन सिर्फ सजावट के लिए नहीं आ रहे हैं।” अधिकारी ने कहा कि योजना “द्वीप और जलडमरूमध्य पर कब्जा करने की है।” माना जा रहा है कि इजरायली अधिकारी का इशारा फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप की ओर था, जो ईरान का पेट्रोलियम निर्यात करने का मुख्य केंद्र है।रिपोर्ट में बताया गया है कि खर्ग द्वीप पर नियंत्रण से तेहरान के तेल राजस्व में काफी कमी आ सकती है और ईरान पर दबाव बन सकता है। इसके साथ ही अमेरिका यह भी दिखा सकता है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए पूरी तरह सक्षम है। होर्मुज जलडमरूमध्य से आमतौर पर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को अमेरिका और उसके मित्र देशों के लिए बंद कर दिया है। ऐसे में यह जलडमरूमध्य इस संघर्ष का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है।

