Lima : दक्षिण अमेरिकी देश पेरू इस समय दुनिया के सबसे अजीबोगरीब चुनाव का गवाह बन रहा है। भ्रष्टाचार और बढ़ती हिंसा से कराह रहे इस देश के 2.7 करोड़ मतदाता रविवार को अपना नया राष्ट्रपति चुनने के लिए कतारों में खड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि इस बार मैदान में एक-दो नहीं, बल्कि 35 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। आलम यह है कि पिछले 10 वर्षों में पेरू आठ राष्ट्रपति देख चुका है और अब 9वें की तलाश जारी है।
केइको फुजीमोरी: पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की बेटी और रूढ़िवादी नेता केइको चौथी बार राष्ट्रपति बनने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने वादा किया है कि वे देश से अपराध को खत्म करेंगी। वे जेलों में काम के बदले खाना और जजों की पहचान गुप्त रखने जैसे कड़े नियम लाना चाहती हैं।
राफेल लोपेज अलीगा: लीमा के पूर्व मेयर राफेल का प्रस्ताव और भी सख्त है। वे अमेजन के जंगलों में जेलें बनाने और अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को देश से बाहर निकालने का वादा कर रहे हैं।
कार्लोस अल्वारेज: कभी कॉमेडियन रहे कार्लोस अब राजनीति के मंच पर हैं। वे सुरक्षा के मुद्दे पर अल सल्वाडोर और सिंगापुर जैसे देशों के विशेषज्ञों की सलाह लेने की बात कर रहे हैं।
इस चुनाव में केवल राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि 30 वर्ष बाद पहली बार द्विसदनीय कांग्रेस का चुनाव भी हो रहा है। हालिया सुधारों के बाद अब पेरू में एक ऊपरी सदन भी होगा।
अब राष्ट्रपति सीनेट को भंग नहीं कर पाएगा, लेकिन सीनेट के पास राष्ट्रपति को हटाने की ताकत होगी। इतना ही नहीं, अब 60 में से सिर्फ 40 सीनेटरों के वोट से राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम संख्या वाले सदन में बहुत अधिक शक्तियां केंद्रित कर दी गई हैं, जिससे भ्रष्टाचार का खतरा और बढ़ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 2018 में जनता ने इस सिस्टम को खारिज कर दिया था, लेकिन नेताओं ने संविधान में संशोधन कर इसे जबरन लागू कर दिया।
‘अब किसी पर भरोसा नहीं’
आम जनता इन वादों और चेहरों से ऊब चुकी है। 53 वर्षीय निर्माण मजदूर जुआन गोमेज कहते हैं, ‘आप किसी पर भरोसा नहीं कर सकते। अपराधी मोटरसाइकिल पर आते हैं, सिर पर बंदूक रखते हैं और लूट लेते हैं। पुलिस कहीं नहीं होती। हम बस लूटने के लिए मजबूर हैं।’
पेरू के इस ‘सियासी सर्कस’ में मुकाबला इतना कड़ा है कि किसी भी उम्मीदवार को 50 फीसदी वोट मिलना नामुमकिन लग रहा है। ऐसे में जून में दूसरे दौर की वोटिंग होना लगभग तय है।

