ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर एक बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। पूर्व वरिष्ठ सिविल सेवक ओली रॉबिन्स ने आरोप लगाया है कि पीटर मैंडेलसन को ब्रिटेन का वॉशिंगटन स्थित राजदूत नियुक्त करने के फैसले को सुरक्षा चिंताओं के बावजूद जल्द मंजूरी देने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया गया था।रॉबिंस, जो पहले विदेश मंत्रालय के प्रमुख रह चुके हैं, को पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री स्टार्मर ने पद से हटा दिया था। उन्होंने मंगलवार को हाउस ऑफ कॉमन्स की विदेश मामलों की समिति के सामने बयान देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दबाव का माहौल था। उन्होंने कहा कि यह बहुत, बहुत मजबूत अपेक्षा थी कि मैंडेलसन को जल्द से जल्द पदभार संभालने के लिए अमेरिका भेजा जाए।
स्टार्मर पर बढ़ा इस्तीफे का दबाव
इस खुलासे के बाद स्टार्मर पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। विपक्षी दलों और आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार ने लापरवाही बरती और राजनीतिक सुविधा को प्राथमिकता दी।
स्टार्मर ने क्या सफाई दी?
वहीं प्रधानमंत्री स्टार्मर ने स्वीकार किया कि मैंडेलसन को इस अहम कूटनीतिक पद के लिए चुनना उनका गलत फैसला था। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सुरक्षा जांच में आई आपत्तियों की जानकारी होती, तो वह नियुक्ति को तत्काल वापस ले लेते।
हालांकि स्टार्मर ने इस मामले की जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों पर डाली है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षा चिंताओं की जानकारी नहीं दी और आपत्तियों के बावजूद मैंडेलसन की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। स्टार्मर ने इसे स्पष्ट रूप से चौंकाने वाला बताया कि जनवरी 2025 में हुई फेल सुरक्षा जांच के बारे में उन्हें पिछले सप्ताह तक नहीं बताया गया।
मैंडेलसन को लेकर क्या विवाद?
गौरतलब है कि स्टार्मर ने सितंबर में, पद संभालने के नौ महीने बाद, मैंडेलसन को उनके पद से हटा दिया था। यह फैसला तब लिया गया जब जेफरी एप्सटीन के साथ उनकी दोस्ती को लेकर नए खुलासे सामने आए। एपस्टीन एक दोषी यौन अपराधी था, जिसकी 2019 में जेल में मौत हो गई थी।

