हैदराबाद : हैदराबाद में कालेश्वरम सिंचाई परियोजना से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में भारत राष्ट्र समिति (BRS) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और तीन अन्य को तेलंगाना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने बुधवार को निर्देश दिया कि पीसी घोष आयोग की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह आयोग कालेश्वरम परियोजना में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए गठित किया गया था।केसीआर और अन्य याचिकाकर्ताओं ने आयोग की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया था। उनका कहना था कि उन्हें अपना पक्ष रखने और जिरह का मौका नहीं दिया गया।
मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति जी.एम. मोहिउद्दीन की खंडपीठ ने आदेश देते हुए कहा कि आयोग का गठन अवैध या असंवैधानिक नहीं है, लेकिन रिपोर्ट में कुछ निष्कर्ष प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना दिए गए हैं। अदालत ने कहा कि जिन निष्कर्षों से याचिकाकर्ताओं की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है और जो बिना उचित प्रक्रिया के दिए गए हैं, वे अमान्य होंगे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
रिपोर्ट में केसीआर के अलावा तत्कालीन सिंचाई मंत्री और अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। बाद में यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई और इसे सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया गया।
क्या है कालेश्वरम प्रोजेक्ट?
कालेश्वरम सिंचाई परियोजना पर आरोप है कि इसके निर्माण में कुछ अनियमितताएं हुईं। इस मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति पी.सी. घोष की अध्यक्षता में आयोग बनाया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।

