Washington : अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग मुलाकात की। दोनों बैठकें ऐसे समय हुईं, जब पश्चिम एशिया में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में बने हुए हैं। व्हाइट हाउस की 36वीं प्रेस सचिव और राष्ट्रपति की सहायक कैरोलिन लेविट ने सोशल मीडिया पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों नेताओं के साथ अपनी बैठकें पूरी कर ली हैं और दोनों बैठकें सकारात्मक तथा उपयोगी रहीं।
दोनों नेताओं का अमेरिका दौरा दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भी था। माना जा रहा था कि इस दौरान उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपने-अपने देशों के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा का मौका मिलेगा। ऐसे समय में यह मुलाकात अहम मानी गई, क्योंकि ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की नीति लगातार चर्चा में है। लिंडसे ग्राहम इस्राइल के मजबूत समर्थक थे और ईरान के कट्टर आलोचक माने जाते थे। अपनी मृत्यु से एक दिन पहले उन्होंने कीव में जेलेंस्की से मुलाकात की थी और रूस पर प्रतिबंध मजबूत करने से जुड़े सीनेट विधेयक पर भी काम कर रहे थे।
नेतन्याहू ने बैठक से पहले एक्स पर लिखा था कि उनका उद्देश्य इस्राइल की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उसकी ताकत बढ़ाना और शांति के दायरे का विस्तार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अमेरिका यात्रा के दौरान लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि देंगे, जिन्हें उन्होंने इस्राइल का सच्चा मित्र बताया। यह नेतन्याहू की फरवरी के बाद पहली वॉशिंगटन यात्रा थी। फरवरी में उनकी मुलाकात के कुछ दिन बाद अमेरिका और ईरान के बीच कई महीने तक चला संघर्ष शुरू हुआ था, जिसके पांच महीने मंगलवार को पूरे हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में दोनों नेता कई मुद्दों पर एकमत दिखे थे, लेकिन हाल के हफ्तों में मतभेद भी सामने आए। ट्रंप ने एक समय नेतन्याहू को “पागल” तक कहा था और यह भी कहा था कि “मेरे बिना इस्राइल नहीं होता।” रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान के साथ हुए उस समझौते, जिसमें 60 दिन के युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात शामिल थी, उसके बारे में नेतन्याहू से पहले से सलाह नहीं ली गई थी। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन की सऊदी अरब के साथ परमाणु ऊर्जा समझौते की योजना और तुर्किये को एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने की संभावित योजना पर भी इस्राइली अधिकारियों ने चिंता जताई थी। हालांकि ट्रंप ने कहा, “मुझे कोई नहीं बताएगा कि हमें क्या बेचना चाहिए।” ईरान युद्ध को लेकर दोनों के मतभेद पर पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “हमारे बीच थोड़ा अंतर है, लेकिन हम काफी हद तक एक राय पर हैं।”
जेलेंस्की ने ट्रंप के सामने क्या प्रमुख मुद्दे रखे?
जेलेंस्की और ट्रंप की इससे पहले इसी महीने तुर्किये के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। इस बार दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के रास्ते पर चर्चा आगे बढ़ने की उम्मीद थी। हाल के सप्ताहों में जेलेंस्की लगातार कह रहे हैं कि यूक्रेन को हथियार और मिसाइलें तेजी से उपलब्ध कराई जाएं, क्योंकि कमी के कारण रूसी हमलों का खतरा बढ़ गया है। तुर्किये में हुई बैठक के दौरान ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर बनाने का लाइसेंस देगा। यूक्रेन लंबे समय से इन रक्षा प्रणालियों के घरेलू उत्पादन की अनुमति मांग रहा था।
हथियारों की कमी और रूस पर क्या बोले ट्रंप?
यूक्रेन के घटते हथियार भंडार पर चर्चा ऐसे समय हुई, जब अमेरिकी अधिकारियों के बीच यह भी विचार हुआ कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव का असर अमेरिका के वायु रक्षा मिसाइल भंडार पर पड़ सकता है। हालांकि ट्रंप ने इन खबरों को खारिज किया कि अमेरिकी सेना के पास मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी है। उन्होंने इसका जिम्मेदार पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन को ठहराया। ट्रंप ने कहा कि बाइडेन ने यूक्रेन को बड़ी मात्रा में हथियार दिए थे, इसलिए अब अमेरिका अपने भंडार को फिर से मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत सारे हथियार हैं। अलग-अलग तरह के हथियार हैं। मध्यम श्रेणी के हथियार भी हमारी जरूरत से ज्यादा हैं। हालांकि मैं चाहता हूं कि हमारे पास और अधिक हों।”
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेन की सेना ने कैस्पियन सागर में ऐसे लक्ष्यों पर हमला किया, जिनमें ईरान से जुड़े सैन्य सामान ले जाने वाले जहाज और एक रूसी युद्धपोत शामिल थे। इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। जेलेंस्की ने यह भी आरोप लगाया कि रूस ने उपग्रह निगरानी के जरिए ईरान को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में मदद की। इस पर ट्रंप ने कहा कि वह सीधे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस बारे में पूछेंगे। उन्होंने कहा, “मैं पुतिन से पूछूंगा। हमें पता चल जाएगा।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसी कोई मदद हुई भी है तो उसका खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि अमेरिका ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है।
व्हाइट हाउस ने आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जेलेंस्की ने दावा किया कि जुलाई की शुरुआत से यूक्रेन ने रूस की ओर से अरब खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की उपग्रह निगरानी दर्ज की है। उनका आरोप था कि इन तस्वीरों और ईरानी हमलों के बीच स्पष्ट संबंध है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन आरोपों या यूक्रेन की ओर से साझा की गई खुफिया जानकारी पर कोई टिप्पणी नहीं की। वहीं ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि उन्हें भरोसा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग किसी बड़े स्तर पर ईरान की मदद नहीं कर रहे हैं।