नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले नेताओं की होड़ लगी हुई है। पहले विधानसभा में तमाम विधायकों ने अलग गुट बनाया, फिर तीन दिन में तीन राज्यसभा सांसदों ने (शुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक) ने साथ छोड़ा। इसके बाद पार्टी के 20+ लोकसभा सांसदों ने बगावत कर, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी का दामन थाम लिया। अब नए घटनाक्रम में पार्टी की राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने राज्यसभा के सदस्य का पद छोड़ दिया है।
कोयल मलिक ने 6 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए नामित किया था, हालांकि अब उनके अचानक इस्तीफे को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति में आने से पहले कोयल मलिक बंगाली फिल्म उद्योग का एक बेहद चर्चित और लोकप्रिय चेहरा रही हैं। उन्हें टॉलीवुड की ‘टॉली-क्वीन’ भी कहा जाता है। पिछले दो दशकों से वह बंगाली सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 2003 में सुपरहिट फिल्म ‘नेटर गुरु’ से की थी। इसके बाद ‘बंधन’ (2004), ‘शुभदृष्टि’ (2005), ‘पागलू’ (2011), ‘हेमलॉक सोसाइटी’ (2012) और ‘मितिन माशी’ थ्रिलर सीरीज (2019) जैसी कई सफल फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई। कोयल मलिक को अपने शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड बांग्ला, दो बीएफजेए अवॉर्ड और साल 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिष्ठित ‘महानायक सम्मान’ प्रदान किया गया था। अगर उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो वह बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक और दीपा मलिक की बेटी हैं। फिलहाल उनके इस फैसले ने टीएमसी की राजनीति और पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

