बीजिंग : चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताने की हिमाकत की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को बेशर्मी की हदें पार करते हुए एक बार फिर दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नामों को बदलना चीन की संप्रभुता के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि हमने कभी भी अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी।
दरअसल, चीन ने 10 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश की कुछ जगहों के नाम जारी करने की कोशिश की थी। इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस तरह की हरकतें भ्रामक और निरर्थक हैं और भारत इन्हें पूरी तरह अस्वीकार करता है। मंत्रालय के अनुसार, चीन का यह कदम गलत और बिना आधार का है। भारत ने दो टूक शब्गों में कहा कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है और रहेगा।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि वर्तमान में चीन-भारत संबंध आम तौर पर स्थिर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजिंग की भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने और विकसित करने की नीति अपरिवर्तित है।
चीन की विस्तारवादी सोच को भारत देता है कड़ी टक्कर
यह मामला भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का एक और पहलू है, जो दोनों देशों के बीच तनाव का एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है। चीन द्वारा अपने नक्शे में भारतीय क्षेत्रों को शामिल करने और उनके नाम बदलने की कार्रवाई अक्सर विवादों को जन्म देती है। भारत लगातार इन दावों को खारिज करता रहा है और अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग बताता रहा है।

