नई दिल्ली : परिसीमन में दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ भेदभाव के आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, यह पूरी तरह गलत है। सच्चाई यह है कि परिसीमन से सीटों की संख्या बढ़ेगी। पांच दक्षिणी राज्यों में लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। सत्ता का प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो जाएगा।शाह ने यह आरोप भी खारिज किया कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया के दौरान कोई गड़बड़ी करेगी। उन्होंने कहा, परिसीमन विधेयक बिल्कुल वैसा ही है, जैसा आपकी सरकार की ओर से लाया गया पिछला कानून था। इसमें कोई बदलाव नहीं है, यहां तक कि अल्पविराम या पूर्णविराम भी नहीं।
- मोदी कैबिनेट ने जाति जनगणना का निर्णय कर लिया है। जनगणना, जाति गणना के आधार पर ही हो रही है। विपक्ष को भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए।
- परिसीमन आयोग का कानून एकदम पुराने कानून के अनुसार है। अभी के चुनाव में इसका कोई असर नहीं होगा।
131वें संविधान संशोधन विधेयक संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन: ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक को संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन बताया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण भारत पर राज करना और विधायिका से ओबीसी प्रतिनिधित्व को खत्म करना है। परिसीमन से पाबंदी हटाने से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलेंगी। इससे छोटे राज्यों और दक्षिण भारत की आवाज दब जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व 38.1 से बढ़कर 43.1% हो जाएगा, जबकि दक्षिणी राज्यों का हिस्सा 24 से घटकर 20% रह जाएगा। वहीं, तृणमूल की काकोली घोष ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बीच विधेयकों को लाना राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश है।
दो तिहाई बहुमत के लिए 67 और सांसदों का साथ चाहिए
सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा की 543 सीटों में से दो तिहाई यानी 360 सदस्यों का समर्थन चाहिए। एनडीए के पास 293 सदस्य तो हैं, लेकिन 67 अतिरिक्त वोट का इंतजाम करना उसके लिए खासा मुश्किल है।
फिलहाल सभी विपक्षी दल कांग्रेस के साथ एकजुट दिख रहे हैं। अगर कुछ विपक्षी दल वोटिंग के दौरान अनुपस्थित हो जाएं और दो तिहाई वोटों का आंकड़ा 360 वोट से घट जाए। तब बिल पास हो सकता है। सपा (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) या डीएमके (22 सांसद) में से दो दल मतदान से दूर रहें, तो विधेयक मंजूर हो सकते हैं। कांग्रेस के पास 98 सांसद हैं। एनडीए की बात करें, तो भाजपा के 240, तेलुगु देशम पार्टी के 16 और जदयू के 12 सांसद हैं।

