मुंबई : क्या सरकारी अधिकारियों के मन में अब कानून का कोई डर नहीं बचा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने अदालत के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करने पर कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग के निदेशक को अदालत के आदेश की अवमानना करने के मामले में सख्त नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों की इस हिम्मत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि कानून का मजाक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुणे के रहने वाले दो युवा सुशांत सरोदे और अनिकेत जाधव सीआईएसएफ और बीएसएफ में भर्ती होना चाहते थे। शारीरिक परीक्षा के दौरान ऊंचाई तय सीमा से थोड़ी कम होने के कारण अधिकारियों ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया था। हाईकोर्ट ने मामले को देखते हुए पाया कि ऊंचाई में यह अंतर बहुत ही मामूली था, इसलिए अदालत ने दोनों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने का स्पष्ट आदेश दिया था। कोर्ट के इस साफ आदेश के बावजूद एसएससी के अधिकारियों ने आदेश का पालन नहीं किया और दोनों युवा अब भी ट्रेनिंग में शामिल होने का इंतजार कर रहे हैं।कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर क्या कहा? अदालत ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जहां देश की सेवा करने वाले अधिकारियों ने भी कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की हिम्मत दिखाई है।

