पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली की गलियों में अब हर कदम पर खौफ का साया मंडरा रहा है। जहां पहले आवारा कुत्तों से लोग परेशान थे, वहीं अब बंदरों का आतंक आमजन की जिंदगी को और मुश्किल बना रहा है। सुबह-सुबह घर से निकलना हो या बाजार में खरीदारी करना, हर जगह बंदरों के हमले का डर लोगों को सताता है। पीछा करना, काट लेना और हाथ से सामान छीनकर भाग जाना जैसी घटनाएं अब रोज़मर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन हालातों के बावजूद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे लोगों में दहशत और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही हैं।
पांडव नगर स्थित रामलीला पार्क में तीन चार बंदरों ने मंगलवार को पार्क में टहल रहे सुशील कुमार को काट लिया था। उन्हें लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल भेज दिया गया।
लोगों ने कहा…
बंदर झुंड बनाकर आते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। अब घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। — रूपेंद्र प्रकाश शर्मा, पांडव नगर
बंदरों के काटने के बाद अभी दो टीके लगे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि अभी दो टीके और लगेंगे। — सुशील कुमार
बंदरों से लोगों में डर का माहौल है। वे झुंड बना कर आते हैं और सामान की तोड़-फोड़ कर चले जाते हैं। — एके गुप्ता, मयूर विहार
लोगों के हाथों से सामान छीन कर भाग जाते हैं। कई बार वे आक्रामक होकर हमला भी कर देते हैं। – लोकेश पांचाल, राम नगर एक्टेंशन
क्या कहते हैं डॉक्टर…
बंदर और कुत्ते के काटने पर घाव वाली जगह को पानी और साबुन या फिर डेटॉल से अच्छे तरीके से धो लेना चाहिए। इसके बाद जल्द से जल्द डॉक्टरों को दिखाना चाहिए। ताकि समय पर रेबीज का टीका लगाया जा सके। बंदर और कुत्ते के काटने पर कम से कम चार-पांच बार टीका लगाना जरूरी है।
— डॉ. देवाशीष परमार, एंटी रेबीज वैक्सीनेशन सेंटर प्रभारी, आरएमएल अस्पताल।
बंदरों को पकड़ने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके लिए टीम भी तैयार की गई है। इससे पहले शकरपुर इलाके से कुछ बंदरों को पकड़ा भी गया है।
— राम किशोर शर्मा, अध्यक्ष शाहदरा दक्षिणी क्षेत्र वार्ड समिति।
इलाके में बंदरों को पकड़ने का अभियान जारी है। पिछले महीने इलाके से करीब 12-15 बंदरों को पकड़ कर भाटी माइंस में छोड़ा गया है।

