छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित अपमान के मुद्दे पर कड़ी आपत्ति जताई है। देव ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ पश्चिम बंगाल में हुआ व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत है।
लोकतांत्रिक परंपराओं में मतभेद को कभी मनभेद में नहीं बदला गया
मुख्यमंत्री देव ने पत्र में लिखा कि वे दुखी मन से दूसरी बार यह पत्र लिख रहे हैं और उम्मीद है कि ममता इस मुद्दे पर संज्ञान लेंगी। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं में मतभेद को कभी मनभेद में नहीं बदला गया है और इन मूल्यों को बनाए रखना जरूरी है।
साय ने आरोप लगाया कि हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान न्यूनतम शिष्टाचार का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि एक जनजातीय समाज से आने वाली महिला राष्ट्रपति के साथ ऐसा व्यवहार किया जाना बेहद पीड़ादायक है, खासकर तब जब यह घटना अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले हुई।
पत्र में यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम का स्थान बदलना और उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ का उल्लंघन है। साय ने इसे देश के आदिवासी, पिछड़े और दलित समाज के साथ-साथ मातृशक्ति का भी अपमान बताया।
इसके साथ ही साय ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस मामले में भी जनजातीय समाज की महिलाओं के साथ अत्याचार हुए, लेकिन राज्य सरकार ने उस पर उचित ध्यान नहीं दिया।
ममता माफी मांगें- साय
मुख्यमंत्री साय ने ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वे राष्ट्रपति, देश और समाज से सच्चे मन से माफी मांगें और भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने का आश्वासन दें। उन्होंने कहा कि ऐसा करना ममता बनर्जी की निजी छवि के लिए भी बेहतर होगा।

