गोविंद चौहान, जम्मू: जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा की जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लगातार जारी है। एलजी मनोज सिन्हा ने बुधवार को दो सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी है। इनमें से फरहत अली खांडे नाम का एक कर्मचारी रामबन में शिक्षा विभाग में क्लास IV का कर्मचारी था। वहीं दूसरा कर्मचारी ग्रामीण विकास विभाग में क्लास-IV का कर्मचारी था, जिसकी पहचान बांदीपोरा के रहने वाले मोहम्मद शफी डार के रूप में हुई है। ये बर्खास्तगी भारत के संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत की गई है। यह सरकारी तंत्र में घुसे आतंकवादियों को जड़ से खत्म करने के लिए चलाए जा रहे अभियान का ही एक हिस्सा है।लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने हाल ही में कहा था कि वह तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक सरकारी मशीनरी से आतंक के कैंसर का आखिरी धागा भी नहीं उखाड़ दिया जाता। आतंकी फरहत हिज्ब उल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था और उसने रामबन और आस-पास के इलाकों में आतंकवाद को फिर से खड़ा करने और एक बड़ा आतंकी नेटवर्क बनाने के लिए अपनी सरकारी हैसियत का इस्तेमाल कवर के तौर पर किया। सूत्रों ने बताया कि फरहत पहली बार 2011 में सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसियों की नजर में आया था। इस समय मारे गए कुछ आतंकवादियों के परिवारों को पैसे बांटने वाले एक हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था।

