New Delhi : कांग्रेस ने मंगलवार को डॉ भीम राव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर खरगे ने कहा कि संविधान आज एक षड्यंत्रकारी हमले का सामना कर रहा है। हमें उनके द्वारा स्थापित प्रत्येक सिद्धांत की रक्षा के लिए खड़ा होना होगा। खरगे ने एक्स पर कहा बाबासाहेब डॉ भीम राव आंबेडकर की जयंती पर, हम उस दूरदर्शी व्यक्ति को गहरी श्रद्धा से नमन करते हैं, जिन्होंने भारत को उसकी नैतिक और संवैधानिक आत्मा दिया की।
उन्होंने कहा कि बाबासाहेब न केवल भारत के संविधान के निर्माता थे, बल्कि स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के लिए एक अथक योद्धा भी थे, ये वे मूल्य हैं जो भारत की अवधारणा को ही परिभाषित करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘आज, जब संविधान एक षड्यंत्रकारी हमले का सामना कर रहा है, तो उनके शब्द और चेतावनियां नए सिरे से प्रासंगिक हो गई हैं। यह साहस और दृढ़ विश्वास का समय है।’ डॉ आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उनका निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ। उन्हें भारतीय संविधान का निर्माता माना जाता है।वही, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को संसद के आगामी विशेष सत्र को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र का मजाक बताया। उन्होंने सत्र के समय पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि सांसदों को चर्चा से पहले संवैधानिक संशोधन विधेयक उपलब्ध नहीं कराए गए थे। संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 से संबंधित प्रमुख संवैधानिक संशोधनों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने लिखा, ‘संसद का विशेष सत्र परसों यानी 16 अप्रैल को शुरू होगा जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। मोदी सरकार ने विपक्ष के उन बिल्कुल उचित और वैध अनुरोधों को खारिज कर दिया है जिनमें चुनाव समाप्त होने के बाद (आज से पंद्रह दिन बाद) सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कही गई थी।’ उन्होंने पोस्ट में लिखा ‘आज सुबह तक, मोदी सरकार ने सांसदों के साथ संविधान संशोधन विधेयक साझा नहीं किए हैं, जिन पर उन्हें बहस और मतदान करना है। यह लोकतंत्र का घोर मजाक है।
एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने लिखा, ‘संसद का विशेष सत्र परसों यानी 16 अप्रैल को शुरू होगा जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर होगा। मोदी सरकार ने विपक्ष के उन बिल्कुल उचित और वैध अनुरोधों को खारिज कर दिया है जिनमें चुनाव समाप्त होने के बाद (आज से पंद्रह दिन बाद) सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कही गई थी।’ उन्होंने पोस्ट में लिखा ‘आज सुबह तक, मोदी सरकार ने सांसदों के साथ संविधान संशोधन विधेयक साझा नहीं किए हैं, जिन पर उन्हें बहस और मतदान करना है। यह लोकतंत्र का घोर मजाक है।
संसद का विशेष सत्र
संसद 16, 17 और 18 अप्रैल को बजट सत्र के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों और महिला विधायकों के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के लिए प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा करने के लिए बैठक करेगी।सरकार ने दो प्रमुख संशोधन करने की योजना बनाई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। जनगणना में देरी के कारण, अब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने की योजना है।
संसद 16, 17 और 18 अप्रैल को बजट सत्र के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों और महिला विधायकों के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के लिए प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पर चर्चा करने के लिए बैठक करेगी।सरकार ने दो प्रमुख संशोधन करने की योजना बनाई है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया है। जनगणना में देरी के कारण, अब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर आगे बढ़ने की योजना है।
संशोधन के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं। परिसीमन के लिए एक अलग विधेयक पेश किया जाएगा। महिलाओं के लिए आरक्षण हेतु दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक है। यथास्थिति बनाए रखते हुए, ओबीसी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण जारी रहेगा। (एएनआई)

