कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश और राजधानी से जुड़े कई गंभीर मुद्दे संसद के सामने हैं, जिन पर चर्चा होना आवश्यक है। अगर संसद ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर बहस का मंच नहीं बनेगी, तो फिर चर्चा कहां होगी।
थरूर ने लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप कर संसद में जारी गतिरोध समाप्त कराने और छात्रों के विरोध प्रदर्शन, भूख हड़ताल, पुलिस कार्रवाई और हिंसा सहित पूरे घटनाक्रम पर खुली चर्चा कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और करीब 100 लोगों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
पवन खेड़ा ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संसद की कार्यवाही को अभूतपूर्व बताते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने से रोका। उनके अनुसार, खरगे दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई कथित हिंसा का मुद्दा उठाना चाहते थे। कांग्रेस की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह संसद के दोनों सदनों में उपस्थित होकर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर स्पष्टीकरण दें। इसके साथ ही छात्रों से जुड़े लगातार पेपर लीक के मामले, युवाओं की आत्महत्या और परीक्षा व्यवस्था में विश्वास के संकट जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन होने के बाद भी लाठीचार्ज क्यों?
कांग्रेस सांसद प्रणीति शिंदे ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन उसके बावजूद जिस तरह प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ। वह स्वीकार्य नहीं है। प्रदर्शन कर रहे छात्र इसी देश के नागरिक हैंं। उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में एक मजबूत, पारदर्शी और ईमानदार परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार किसी भी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं कर रही। उनके अनुसार, न मंत्री, न अधिकारी और न ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की जवाबदेही तय की जा रही है, जिससे छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है।