मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और संसद के भीतर तथा बाहर लगातार जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, छात्रों और महिलाओं से जुड़े सवालों के साथ दलितों की आवाज भी उठाई है। खरगे ने आरोप लगाया कि ऐसे नेता को एफआईआर के जरिए डराने या बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह की कार्रवाई से भयभीत नहीं होगी।
खरगे ने दो टूक कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ जितनी FIR दर्ज करनी है, कर लें, कांग्रेस उनका सामना करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर दलितों के हित में काम करने के कारण राहुल गांधी को निशाना बनाया जा रहा है तो ऐसी कोशिश सफल नहीं होगी।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद से कैसे जुड़ा मामला?
विवाद की शुरुआत आठ अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद हुई। यह रैली 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित की गई थी। रैली के बाद दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई। खरगे ने राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठाया और सवाल किया कि लोकतंत्र में इस तरह की प्रथा को कैसे स्वीकार किया जा सकता है। खरगे ने खुद को दलित समुदाय से बताते हुए कहा कि यह केवल उनके बारे में नहीं, बल्कि देश के दलित समुदाय से जुड़े सम्मान और अधिकार का सवाल है।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई?
30 अगस्त को राहुल गांधी के खिलाफ उनके बयानों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई। यह कार्रवाई वाल्मीकि समुदाय से जुड़े अमित कुमार की शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से अनुसूचित जाति समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। पुलिस ने मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं 3(1)(r) और 3(1)(u) के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 के तहत प्रावधान लगाए।
राहुल गांधी ने शुद्धिकरण अनुष्ठान पर क्या कहा था?
राहुल गांधी ने हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद हुए शुद्धिकरण अनुष्ठान को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने इसे ‘छुआछूत का दूसरा नाम’ बताया था और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी। राहुल गांधी का कहना था कि इस तरह की कार्रवाई संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।