मद्रास हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद स्टालिन की ओर से कोलाथुर चुनाव परिणाम को चुनौती देने की मौजूदा कानूनी मांग को राहत नहीं मिली। उनकी याचिका में उठाई गई 100 फीसदी वीवीपीएटी गिनती, सभी मशीनों के दोबारा सत्यापन, पुनर्गणना और खुद को विजेता घोषित करने जैसी मांगें अदालत ने स्वीकार नहीं कीं।
याचिका में स्टालिन ने वोटों की दोबारा गिनती कराने और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के विधायक वीएस बाबू की जीत को रद्द करने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने खुद को कोलाथुर सीट से विजेता घोषित करने की अपील भी अदालत से की थी। स्टालिन का दावा था कि मतदान प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ। इसी आधार पर उन्होंने सभी मतदान मशीनों की दोबारा जांच और VVPAT पर्चियों की शत-प्रतिशत गिनती की मांग उठाई थी।
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कोलाथुर सीट पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला। स्टालिन को नवगठित टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से हराया। कोलाथुर को स्टालिन का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। वह इस सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके थे और चौथी बार भी जीत की कोशिश में थे, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बावजूद स्टालिन ने मतदाताओं का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि डीएमके गठबंधन को 1.54 करोड़ से अधिक वोट मिले और विजेता दल के मुकाबले वोटों का अंतर महज 3.52 प्रतिशत रहा।
कोलाथुर में जीत के बाद वीएस बाबू ने अपनी सफलता का श्रेय पार्टी प्रमुख विजय और स्थानीय स्तर पर लोगों से अपने जुड़ाव को दिया था। उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु की जनता बदलाव चाहती थी और इसी वजह से उन्हें जीत मिली। बाबू ने यह भी कहा था कि वह इसी क्षेत्र में पले-बढ़े हैं और स्थानीय लोगों की नब्ज को समझते हैं। उनके मुताबिक, स्टालिन को कोलाथुर के स्थानीय लोगों के साथ ज्यादा जुड़ना चाहिए था।