चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने पर अकाली दल का पंजाब में हौसला बुलंद है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने इसे पार्टी के बिखरने की शुरुआत बताया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की राजनीति अब शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर की ओर बढ़ रही है।
‘AAP ने राज्यसभा का टिकट बेंचा’
पंजाब की सत्ताधारी पार्टी के नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पार्टी ने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को इनाम देने के बजाय ‘राज्यसभा के टिकट बेचकर’ अपने ही कार्यकर्ताओं को नाराज किया है। उन्होंने इकॉनोमिक टाइम्स से बताया कि पार्टी छोड़कर जाने वाले कुछ सांसद तो मूल रूप से पंजाब के भी नहीं थे और वे संसद में राज्य के मुद्दों को उठाने में भी नाकाम रहे थे।
सांसदों का जमीनी स्तर पर कोई जुड़ाव नहीं’
सुखबीर सिंह बादल ने आरोप लगाया कि दलबदल करने वाले सांसदों का ‘जमीनी स्तर पर कोई जुड़ाव नहीं था’। वे जनसेवा के बजाय निजी महत्वाकांक्षाओं और व्यावसायिक हितों से प्रेरित थे।सुखबीर सिंह बादल ने अकाली दल को राज्य की एकमात्र गहरी जड़ें जमा चुकी राजनीतिक शक्ति के तौर पर पेश किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब में यह एकमात्र ऐसी पार्टी है जो अपने कार्यकर्ताओं के दम पर चलती है। उन्होंने SAD के ‘पंजाब बचाओ’ जनसंपर्क अभियान को लेकर कहा कि हम लगातार लोगों के साथ खड़े रहे हैं।अकाली दल प्रमुख ने दलबदल के राजनीतिक असर पर बीजेपी को हुए फायदे को कम करके आंका। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से पार्टी को सिर्फ ‘मनोवैज्ञानिक फायदा’ मिला है, जबकि पंजाब में जमीनी स्तर पर उसकी ताकत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।सुखबीर सिंह बादल ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि मतदाता किसी क्षेत्रीय ताकत का ही समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले चुनाव में पंजाब की जनता अपनी ही पार्टी को आशीर्वाद देगी। अगर कोई असली मुकाबला होगा, तो वह अकाली दल और कांग्रेस के बीच ही होगा। बीजेपी के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर बादल ने कहा कि अकाली दल फिलहाल अपने संगठन को मजबूत करने, अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने और अपने जनाधार का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

