नई दिल्ली: नैशनल क्राइम रेकार्ड्स ब्यूरो ( एनसीआरबी ) ने पहली बार जानवरों के साथ क्रूरता से जुड़े मामलों को अपनी क्राइम इन इंडिया 2024 रिपोर्ट में शामिल किया है। यह डेटा प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 के तहत दर्ज हुए मामलों पर आधारित है। एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार 2024 में जानवरों के साथ क्रूरता के कुल 9039 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 10,257 (99.5 प्रतिशत) बालिग पुरुष थे। पुलिस ने 96.7% मामलों में चार्जशीट भी दाखिल की। इससे जांच के स्तर पर अच्छी कार्रवाई दिखी। इसके बावजूद में लंबित रहे।
साल के अंत तक 2070 (करीब 22.9 प्रतिशत) मामले
अदालतों में पहुंचे मामलों में सजा की दर 80.5% रही, जबकि महानगरों में यह आंकड़ा 93.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि जिन मामलों का फैसला हुआ, उनमें ज्यादातर में पर्याप्त सबूत मिले। इसके बावजूद अदालतों में 82.2 प्रतिशत मामले अभी भी लंबित हैं। कुछ मामले 10 साल से ज्यादा समय से अटके हुए है। इससे न्याय प्रक्रिया में देरी की समस्या सामने आई है।
रिपोर्ट में जानवरों की चोरी के 8660 मामले भी दर्ज किए गए
रिपोर्ट में जानवरों की चोरी के 8,660 मामले भी दर्ज किए गए है। इनकी कुल कीमत करीब 48.8 करोड़ रुपये आंकी गई। इनमें 44.9 प्रतिशत मामलों में चोरी हुए जानवर बरामद कर लिए गए। यह संपत्ति से जुड़े अपराधों के राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
एनिमल एक्टिविस्ट और संस्थाओं के मुताबिक एनसीआरबी में यह डेटा शामिल होने के बाद अब देशभर में जानवरों के खिलाफ अपराधों की निगरानी आसान होगी और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कार्रवाई का रेकॉर्ड रखा जा सकेगा। विशेषज्ञ का कहना है कि इससे भविष्य में बेहतर कानून और नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
जानवरों के खिलाफ अपराध रोकने में मदद मिलेगी
पहली बार अन्य क्राइम कैटिगिरी के साथ जानवरों पर क्रूरता के मामलों का विश्लेषण भी हो पा रहा है। अब भारत में राष्ट्रीय स्तर पर डेटा उपलब्ध होने से ऐसे मामलों के पैटर्न को समझने और अपराध रोकने के बेहतर तरीके बनाने में मदद मिलेगी।
पिपल्स फॉर एनिमल्स से जुड़ी श्रीमोयी चक्रवर्ती ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि पहली बार जानवरों के खिलाफ अपराधों को राष्ट्रीय अपराध आंकड़ों में जगह मिली है।

