अहमदाबाद : अहमदाबाद में एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI-171 विमान हादसे की पहली बरसी पर अहमदाबाद के अधिकारियों ने त्रासदी के दौरान किए गए राहत और बचाव अभियान को याद किया है। इसमें डॉक्टरों, पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, प्रशासन और स्वयंसेवकों ने मिलकर 260 मृतकों की पहचान और पीड़ित परिवारों की सहायता की थी। सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने उस दुखद दिन के बारे में अपना अनुभव साझा किया है।
एआई171 प्लेन क्रैश के ठीक बाद अहमदाबाद सिविल अस्पताल परिसर शोक संतप्त परिवारों की मदद करने वाले लोगों, अधिकारियों, NGO और स्वयंसेवकों से भर गया था। अधिकारियों ने उस मंजर को याद करते हुए प्रार्थना की कि ऐसी त्रासदी दोबारा कभी न हो। अधिकारियों ने बताया कि कैसे एक अकल्पनीय स्थिति के बीच शहर ने अपना सबसे बड़ा अपातकालीन अभियान शुरू किया। इसमें चिकित्सीय जरूरतों के लिए तेजी से तालमेल बिठाया गया और ट्रॉमा टीमों को फौरन तैनात किया गया। हादसे की भयावहता ऐसी थी कि कई शव बुरी तरह जल गए थे।
डीएनए के जरिए किया गया था शवों का परीक्षण
इस भीषण दुर्घटना में जल गए शवों का हाल ऐसा था कि उनकी पहचान करना भी संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में अधिकारियों ने मृतकों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण को ही एकमात्र भरोसेमंद तरीका माना। फोरेंसिक टीमों ने दूसरे विशेषज्ञों के साथ मिलकर लगातार काम किया ताकि पीड़ितों के शवों को सम्मानजनक तरीके से संभाला जा सके। अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश जोशी ने बताया कि डॉक्टरों, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, एनजीओ, राहत टीमों और दमकल विभाग के मिले-जुले प्रयासों की वजह से कम समय में ही स्थिति को व्यवस्थित ढंग से संभाल लिया गया।
हादसे का याद कर क्या बोले डॉक्टर?
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि कहा, ‘हमने कभी नहीं सोचा था कि हम अपनी जिंदगी में ऐसा कुछ देखेंगे।’ डॉ. जोशी एक जटिल सर्जरी कर रहे थे, तभी हॉस्टल इलाके के पास धुआं उठने की सूचना मिली। इसके कुछ ही समय बाद उनको जानकारी मिली कि एअर इंडिया का एक अंतरराष्ट्रीय विमान क्रैश हो गया था। हादसे के ठीक बाद जो हुआ, वह शहर में देखा गया अब तक का सबसे बड़ी आपातकालीन चिकित्सीय प्रतिक्रिया था। पीड़ितों को अस्पताल लाए जाने से पहले ही सिविल अस्पताल ने मास-कैजुअल्टी प्रोटोकॉल (बड़ी संख्या में हताहत होने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया) लागू कर दिया था। अधिकारी ने बताया कि डॉक्टरों के ग्रुप में मैसेज भेजे गए, इमरजेंसी दवाओं का इंतजाम किया गया, ब्लड बैंकों को अलर्ट किया गया और ट्रॉमा टीमों को फौरन तैनात किया गया। जोशी ने बताया कि अस्पताल पहुंचने वाले पहले घायल व्यक्ति हॉस्टल कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले माली थे।

