नई दिल्ली: कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की विफलता का स्मारक करार दिया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में इसका जवाब देना चाहिए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। उन्होंने सदन में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए और यह दावा किया कि 2024 में लाया गया मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में नाकाम रहा था और नया प्रस्तावित कानून भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं होगा।
गौरव गोगोई बोले- ये केवल दिखावे का बिल
गौरव गोगोई ने कहा कि मंत्री जितेंद्र सिंह के वक्तव्य और विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है और यह केवल दिखावे का विधेयक है। उनके मुताबिक, 2024 में जब इसी तरह का विधेयक लाया गया था तब सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए दावा किया था कि पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन उसी वर्ष नीट-यूजी पेपर लीक मामले में 45 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से अधिकतर को जमानत मिल चुकी है। उनका कहना था कि मामले के कथित मास्टरमाइंड को भी जमानत मिल गई।
‘2024 का कानून विफल साबित हुआ’
गौरव गोगोई ने दावा किया कि 2024 का कानून उस समय भी विफल साबित हुआ था और नया कानून भी विफल रहेगा, क्योंकि यह सरकार की विफलता का स्मारक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब 2024 में पेपर लीक का मामला सामने आया था तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इससे इनकार किया था और इस बार भी उनका रवैया वैसा ही रहा। कांग्रेस सांसद ने संसद परिसर में भाजपा के कुछ सदस्यों द्वारा प्रधान का स्वागत किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि इस सरकार को शर्म आनी चाहिए कि संसद में पूर्व मंत्री का ऐसा स्वागत किया गया मानो वह पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों।
प्रधानमंत्री इंस्टाग्राम पर ध्यान की बात करते हैं: गोगोई
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक माफिया, कोचिंग माफिया और परीक्षा प्रणाली में धांधली पर चर्चा करने के बजाय प्रधानमंत्री ‘इंस्टाग्राम’ पर ध्यान देने की बात करते हैं। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री ने उच्चाधिकार समिति का उल्लेख किया है, लेकिन सरकार यह बताए कि उसकी ओर से गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ। गोगोई ने दावा किया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के 47 लोगों को हटाए जाने की बात कही गई, जबकि संस्था में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की।

