NEET Row:नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और इसकी लीपापोती के लिए प्रधानमंत्री मोदी और मंत्री प्रधान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और उसका तंत्र राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की ओर से कराई गई परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और धांधली के सबूतों को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार पेपर लीक माफिया के साथ मिलकर सच्चाई को दबाने का काम कर रही है। इससे पहले एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने संसदीय समिति को बताया था कि नीट-यूजी 2026 का पूरा पेपर लीक नहीं हुआ था और परीक्षा से पहले केवल कुछ सवाल ही सामने आए थे। उनके इस बयान के बाद ही रमेश की यह टिप्पणी सामने आई है।
जयराम रमेश ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि 2018 में एनटीए बनने के बाद से मोदी सरकार और उसका तंत्र पेपर लीक माफिया के साथ मिलकर एनटीए की परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों और धांधलियों की सच्चाई को दबा रहे हैं।
- उन्होंने एनटीए के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि पूरा पेपर लीक नहीं हुआ था।
- उन्होंने कहा कि ऐसा गेस पेपर छात्रों के बीच घूम रहा था, जिसमें कई वही सवाल थे जो असली परीक्षा में आए।
उन्होंने कहा, आज मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि एनटीए के महानिदेशक ने कल संसदीय समिति को बताया कि नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक नहीं हुआ। अगर यह सही है तो यह बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाली बेईमानी है, क्योंकि यह साफ है कि एक ‘गेस पेपर’ परीक्षा से काफी पहले छात्रों के बीच वायरल हो चुका था, जिसमें असली परीक्षा के दर्जनों सवाल थे। अगर यह लीक नहीं है, तो फिर क्या है? मोदी सरकार अब इसे नकारने की कोशिश क्यों कर रही है?
‘नीट 2024 में हुई गड़बड़ियों पर नहीं हुई कार्रवाई’
रमेश ने केंद्र सरकार पर नीट-यूजी 2024 में हुई गड़बड़ियों पर कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि 2024 में जिन जगहों पर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, वही जगहें 2026 विवाद में भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने पहले भी नीट-यूजी 2024 में सामने आई व्यापक गड़बड़ियों को दबाने की कोशिश की थी। अगर उस समय सच्चाई स्वीकार कर कार्रवाई की जाती, तो शायद नीट 2026 की यह त्रासदी टाली जा सकती थी। 2024 में जिन जगहों पर गड़बड़ी की खबरें आई थीं, जैसे राजस्थान का सीकर, वही जगहें 2026 घोटाले में भी सामने आई हैं।
उन्होंने यूजीसी नीट 2024 परीक्षा की जांच पर भी सवाल उठाए। रमेश ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी न होने की बात कही थी, जबकि उसी परीक्षा को एनटीए ने रद्द कर दिया था।
‘जांच में न्याय की उम्मीद नहीं दिखती’
उन्होंने लिखा, इसी तरह की एक और घटना में सीबीआई ने यूजीसी-नीट 2024 परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने की बात कहते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। दिल्ली की कोर्ट ने जब इस रिपोर्ट पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा, तो सीबीआई ने और समय मांगा। कोर्ट ने इस देरी पर सीबीआई को फटकार लगाई। लेकिन एजेंसी की कार्रवाई से नीट की जांच में न्याय मिलने की उम्मीद नहीं दिखती।

