देहरादून-शिक्षा केवल डिग्री अथवा परीक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य की दिशा तय करने का माध्यम है। बदलती दुनिया में विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान, नवाचार, डिजिटल माध्यम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ज्ञान देना समय की आवश्यकता बन चुका है।
उक्त उद्गार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘’नई पहचान, नया सम्मान-आधुनिक शिक्षा” से उज्ज्वल भविष्य’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आईआरडीटी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में तकनीकी बदलाव जिस तेजी से हो रहे हैं, उसमें आने वाली पीढ़ी को भविष्य के अनुरूप तैयार करना शिक्षण संस्थानों की बड़ी जिम्मेदारी है। बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें तथा शिक्षा को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझ सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का परिणाम केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों से नहीं आंका जाना चाहिए। बच्चों में समस्या का समाधान करने, नए प्रयोग करने, तकनीक को समझने और अपने ज्ञान को व्यवहार में लागू करने की क्षमता विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी की रुचि चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रशासन, विज्ञान, लेखन अथवा किसी अन्य क्षेत्र में हो सकती है। इसी तरह कृषि से जुड़े विद्यार्थियों को भी आधुनिक कृषि पद्धतियों और तकनीकों की जानकारी दी जानी चाहिए। प्रत्येक क्षेत्र में बदलाव हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था को भी इन परिवर्तनों के अनुरूप आगे बढ़ना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बच्चे कम उम्र में ही डिजिटल तकनीक से परिचित हो रहे हैं। 14-15 वर्ष के विद्यार्थी कई ऐसी तकनीकी जानकारियां रखते हैं, जिनसे कई बार बड़े लोग भी अनभिज्ञ होते हैं। ऐसे में उनकी जिज्ञासा और तकनीकी क्षमता को सकारात्मक दिशा देना परिवार, समाज और शिक्षण संस्थानों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे में अलग-अलग क्षमता और प्रतिभा होती है। जरूरत इस बात की है कि उसे पहचानकर उसके विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। बच्चों से संवाद करना, उनकी बात सुनना और उनकी रुचियों को समझना बेहतर शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद है।
मुख्यमंत्री ने मान्यता प्राप्त करने वाले शिक्षण संस्थानों को बधाई देते हुए कहा कि प्रमाण-पत्र मिलना केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे की जिम्मेदारियों की शुरुआत है। इन संस्थानों को अपने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम करना होगा।
समारोह में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री खजान दास, उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों के संचालक, शिक्षक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

