श्रीलंका: भारत ने तूफान प्रभावित श्रीलंका को बैली पुल और सैकड़ों जल-शोधन इकाइयां भेजी हैं। यह कदम मानवीय सहायता के तहत अलग-थलग पड़े समुदायों को फिर से जोड़ने और जरूरी सेवाओं को बहाल करने के लिए उठाया गया है। द्वीप राष्ट्र में चक्रवात दित्वाह के कारण भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान हुआ। इससे कई जिले अलग-थलग पड़ गए हैं और देश की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है। बुधवार शाम तक विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में 479 लोग मारे गए और 350 लोग लापता हैं। यह स्थिति 16 नवंबर से चरम मौसम की वजह से बनी है।
बुधवार को आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में आंध्र प्रदेश के रियल टाइम गवर्नेंस सचिव भास्कर कतामनेनी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति के डिजिटल अर्थव्यवस्था सलाहकार हंस विजयसूरिया और गवटेक टीम के साथ डिजिटल माध्यम से ‘टूलकिट’ साझा की, जिसमें राज्य सरकार की आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया के बेहतरीन अनुभव दिखाए गए।
भारत ऑपरेशन सागर बंधु के तहत श्रीलंका को मानवीय मदद दे रहा है, ताकि प्रभावित लोगों तक तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। इसमें हवाई, समुद्री और जमीनी ऑपरेशन शामिल हैं। श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा, सागर-बंधु पहल के तहत भारत की त्वरित मदद हमारी साझेदारी और देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सद्भाव को दर्शाती है। अधिकारियों के मुताबिक, चक्रवात से श्रीलंका को करीब छह से सात अरब अमेरिकी डॉलर बीच आर्थिक नुकसान हुआ है, जो देश की कुल जीडीपी का 3-5 फीसदी है।

