नई दिल्ली : एनसीईआरटी विवाद को लेकर कांग्रेस ने संघ पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का इस मामले पर गुस्सा जायज है। कांग्रेस पार्टी ने दावा किया कि पिछले एक दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शरारत और द्वेष के साथ किताबों को फिर से लिखा है और ये मामला उसी का नतीजा है। कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एनसीईआरटी की आठवीं की एक किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले हिस्से पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और किताब पर प्रतिबंध लगा दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, ‘NCERT की किताबों में न्यायपालिका के आलोचना वाले जिक्र पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा जायज है।’ उन्होंने लिखा, ‘असल में, पिछले दस वर्षों में जिस तरह से एनसीईआरटी की टेक्स्टबुक्स को फिर से लिखा गया है, वह शर्मनाक होने के साथ-साथ खतरनाक भी है। यह संघ की शरारत और द्वेष से भरी कोशिश है। इसकी जांच होनी चाहिए।’मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूली शिक्षा विभाग के सचिव को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया और उनसे पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।पीठ ने नई टेक्स्टबुक में न्यायपालिका के बारे में आपत्तिजनक बातों पर खुद संज्ञान लिया था।NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की क्लास 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में लिखा गया है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है और मामलों का बहुत बड़ा बैकलॉग और जजों की सही संख्या की कमी न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों में से हैं।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह किसी को भी न्यायपालिका की छवि को खराब करने की इजाजत नहीं देगा। सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में विवादित अंश को लेकर बिना शर्त माफी मांगी।

