लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे के आधार पर जीत दर्ज करने की कोशिश हुई। दूसरी तरफ विपक्ष ने भाजपा को स्थानीय मुद्दों के आधार पर घेर लिया। सबसे अधिक सवाल सांसदों के क्षेत्र से गायब रहने को लेकर उठे। स्थानीय मुद्दे भाजपा के चुनावी अभियान से पूरी तरह गायब दिखे। इस कारण स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना उम्मीदवारों को करना पड़ा। कैडर चुनाव के समय उदासीन हो गया और विपक्ष ने यहीं पर पार्टी को घेर लिया। लेकिन, इस हार से सबक लेते हुए भाजपा-आरएसएस ने स्थानीय मुद्दों को अब तरजीह देनी शुरू की है। सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं क्षेत्रीय स्तर की बैठकों में शामिल होकर मूड टटोल रहे हैं।
2027 का चुनाव है अहम
यूपी चुनाव 2027 भारतीय जनता पार्टी के लिए अहम है। ऐसे में भाजपा के साथ-साथ आरएसएस ने भी चुनाव को लेकर तैयारियों को शुरू कर दिया है। जमीनी हकीकत की टोह ली जा रही है। इसको लेकर नए प्रयोग किए जा रही है। यूपी की राजनीति में वर्ष 2014 से भाजपा का बर्चस्व बना हुआ है। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को भारी जीत मिली और डबल इंजन की सरकार बन गई।हालांकि, यह पहली बार है, जब चुनाव से करीब एक साल पहले संघ और भाजपा की क्षेत्रवार बैठकें शुरू हुई हैं। इन बैठकों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन मंत्री और सीएम योगी आदित्यनाथ तक भाग ले रहे हैं। ऐसे में इन बैठकों के महत्व को समझा जा सकता है।
मुद्दों की टटोल रहे जमीनी हकीकत
प्रदेश स्तर पर पिछले दिनों गरमाए मुद्दों की जमीनी हकीकत को टटोलने की कोशिश शुरू हो गई है। इसमें यूजीसी विवाद सबसे अहम है। इसके नफा-नुकसान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, संघ-भाजपा के क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय बैठकें लगातार होती रही हैं। इसमें दोनों तरफ के सीनियर पदाधिकारी शामिल होते रहे हैं। हालांकि, यह पहली बार है कि इसमें सीएम योगी आदित्यनाथ तक शामिल हो रहे हैं।
यूपी में संघ की सक्रियता लगातार बढ़ी हुई है। संघ प्रमुख मोहन भागवत पिछले एक साल में प्रदेश के हर हिस्से की यात्रा कर चुके हैं। जमीनी स्तर पर राजनीतिक हलचल की टोह लेते रहे हैं। ऐसे में संघ सीएम योगी के प्रति अपने रुख को सकारात्मक बनाए दिख रहा है।
मुद्दों को पहचानने की कोशिश
क्षेत्रीय स्तर की बैठकों में मुद्दों को पहचानने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत राजनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा को तय किया जाएगा। संघ की ओर से हिंदू सम्मेलनों के जरिए एकजुटता का संदेश दिया है। यूजीसी के नए नियमों के कारण भाजपा-संघ असहज दिखा है। वहीं, पीडीए के साथ विपक्ष जातीय समीकरण को मजबूत करते हुए यूजीसी मुद्दे के साथ अगड़ों को भी साधने की कोशिश में है।

