इस्लामाबाद: ईरान में चल रहे युद्ध के बीच पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने सरकार से आपातकालीन फंड की मांगा है। पाकिस्तान जो आर्थिक कंगाली से जूझ रहा है उसके सामने अब सवाल ये है कि वो सेना के लिए फंड की व्यवस्था कहां से करेगी। असीम मुनीर ने आपातकालीन फंड मांगने के पीछे दुनिया में छिड़े अलग अलग संघर्षों का हवाला दिया है। पाकिस्तान के सीनियर सरकारी सूत्रों ने कहा है कि असीम मुनीर ने शहबाज शरीफ से तत्काल फंडिंग की मांग की है।
न्यूज 18 ने पाकिस्तान सरकार के सीनियर सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि असीम मुनीर ने सरकार से कहा है कि पाकिस्तान की सेना कई मोर्चों पर सुरक्षा खतरों से जूझ रही है और वो वित्तीय संकट का सामना कर रही है इसलिए उसे तत्काल फंड चाहिए। रिपोर्ट में इस बातचीत से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि फंड की मांग 9 मार्च को को असीम मुनीर ने शहबाज शरीफ के साथ हुए एक बैठक के दौरान की है।
पाकिस्तान सेना को चाहिए आपातकालीन फंड
रिपोर्ट में आधिकारिक सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि असीम मुनीर ने शहबाज शरीफ को पाकिस्तानी सेना के सैन्य अभियान और देश के सामने मौजूद समस्याओं के बारे में जानकारी दी है। इसमें LoC पर झड़पें, तालिबान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव और खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन शामिल हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने चेतावनी दी कि चरमपंथियों के खिलाफ एक साथ ऑपरेशन और बॉर्डर पर बढ़ते तनाव से सुरक्षा व्यवस्था पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा है।
सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 ने बताया है कि मुनीर ने तत्काल अतिरिक्त डिफेंस और ऑपरेशनल फंड का अनुरोध किया है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना के चल रहे ऑपरेशन के स्केल को देखते हुए तत्काल वित्तीय मदद की जरूरत है। खबर है कि शहबाज शरीफ ने आर्मी चीफ को भरोसा दिलाया है कि सरकार आगे और फंड का इंतजाम करेगी।
पाकिस्तान में पहले ही बढ़ाया जा चुका है डिफेंस बजट
पाकिस्तान की सरकार ने पहले ही 2025-26 वित्तीय वर्ष के लिए अपने डिफेंस खर्च में लगभग 20 प्रतिशत का इजाफा किया है। इससे मिलिट्री बजट 2.55 ट्रिलियन रुपये (लगभग 9 अरब डॉलर) हो गया है। लेकिन इस बढ़ोतरी के बावजूद सरकार को मिलिट्री ऑपरेशन जारी रखने, बॉर्डर की सुरक्षा को मजबूत करने और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित करने के लिए आपातकालीन आधार पर अतिरिक्त फंड की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इलीलिए सवाल ये है कि क्या सऊदी अरब पाकिस्तान की फंड देकर मदद करेगा?

