खंडवा: जिले में वन भूमि को मुक्त कराने गई टीम को माफिया और ग्रामीणों के भीषण आक्रोश का सामना करना पड़ा। पिपलोद थाना क्षेत्र की आमा खुजरी बीट में जब वन विभाग के दस्ते ने अवैध झोपड़ियां हटाने की कोशिश की, तो वहां मौजूद भीड़ हिंसक हो गई। अतिक्रमणकारियों ने न केवल गालियां दीं, बल्कि अधिकारियों को हड्डियां तोड़ने तक की सीधी धमकी दे डाली। तनाव इतना बढ़ गया कि सुरक्षा कारणों से टीम को बिना कार्रवाई किए पीछे हटना पड़ा।
3000 हेक्टेयर पर योजनाबद्ध तरीके से कब्जा
गुड़ी वनपरिक्षेत्र का गणित बेहद उलझा हुआ है। यहां कुल 12 हजार हेक्टेयर जंगल में से करीब 3 हजार हेक्टेयर पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर अवैध कब्जा किया जा चुका है। वन विभाग के अनुसार, यह कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि खरगोन के झिरनिया और बामंदा जैसे इलाकों से आए लोग एक सोची-समझी साजिश के तहत महिलाओं को आगे कर रहे हैं ताकि पुलिस और प्रशासन सख्त कार्रवाई न कर सके। विवाद की शुरुआत 21 मार्च की रात हुई, जब मिलाईखेड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 748 में रातों-रात अवैध निर्माण कर लिए गए। अगले दिन जब टीम बुलडोजर और अमले के साथ पहुंची, तो आमाखुजरी टांडा और आसपास के सैकड़ों लोग लाठी-डंडों के साथ जमा हो गए। सरकारी काम में बाधा डालते हुए इन लोगों ने वनकर्मियों को मौके से खदेड़ दिया।

