कर्नाटक : कर्नाटक के बिदर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंच से ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर तीखा राजनीतिक हमला बोला. मंच पर खरगे की मौजूदगी में उपराष्ट्रपति ने कहा कि कभी‑कभी उन्हें ऐसा लगता है कि खरगे जी काले और सफेद के बीच, या फिर आतंकवाद और आतंकियों के बीच फर्क नहीं कर पाते. यह टिप्पणी उन्होंने सीधे खरगे को संबोधित करते हुए की, जिसे मौजूदा राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए बयान पर देशभर में विवाद छिड़ा हुआ है. खरगे की टिप्पणी पर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है.
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी को बीजेपी ने घोर आपत्तिजनक बताया है. इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग (ECI) से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.
केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू के नेतृत्व में एक हाई‑लेवल बीजेपी प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा. इस प्रतिनिधिमंडल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल थे.
शिकायत दर्ज कराने के बाद किरन रिजिजू ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहना सिर्फ अपमान नहीं, बल्कि एक अपराध है. यह राष्ट्रीय और लोकतांत्रिक मुद्दा है. किसी भी राजनीतिक दल ने पहले कभी प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई भी राजनीतिक दल ऐसी भाषा का प्रयोग करता है तो यह किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के खिलाफ निंदनीय कृत्य है. रिजिजू ने चुनाव आयोग से मांग की कि मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पार्टी देश की जनता से माफी मांगें। उन्होंने बताया कि आयोग ने शिकायत सुनी है और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है.
इस पूरे विवाद के बीच मल्लिकार्जुन खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा. खरगे के मुताबिक, उनका आशय यह था कि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार जांच एजेंसियों (ED, I‑T, CBI) के जरिए राजनीतिक दलों और नेताओं को डराने‑धमकाने का माहौल बना रही है.
खरगे ने कहा, ‘मैंने कभी यह नहीं कहा कि पीएम मोदी आतंकवादी हैं. मेरा मतलब यह था कि वह लगातार धमकी देने की राजनीति करते हैं.’
राजनीतिक माहौल और तीखा
उपराष्ट्रपति की टिप्पणी, खरगे का बयान और बीजेपी की चुनाव आयोग में शिकायत. इन तीनों घटनाओं ने मिलकर राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा दिया है. खासतौर पर तब, जब कई राज्यों में चुनावी माहौल है और आदर्श आचार संहिता को लेकर सियासी दल सतर्क तो हैं, लेकिन बयानबाज़ी लगातार तेज होती जा रही है.

