नई दिल्ली : लद्दाख के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों और मुकदमों के मुवक्किलों के लिए न्याय पाना अब बेहद आसान और सुलभ होने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख साझा हाई कोर्ट की नियमित बेंच (पीठ) के आयोजन का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है। गुरुवार को राष्ट्रपति की ओर से जारी किए गए इस नए नियम के तहत अब लद्दाख के वादकारियों (मुकदमेबाजों) को सुनवाई के लिए श्रीनगर या जम्मू के चक्कर काटने से बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय न केवल न्यायिक सुगमता की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को उनके अधिकारों के प्रति सुरक्षा और कानूनी सशक्तिकरण का मजबूत भरोसा भी दिलाता है।
राष्ट्रपति ने किस सांविधानिक शक्ति का प्रयोग किया?
राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत अपनी विशिष्ट सांविधानिक शक्ति का प्रयोग किया है। यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए विनियमन बनाने का अधिकार देता है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, अनुच्छेद 240 के साथ मिलकर लद्दाख के संबंध में ऐसे विनियमों का सांविधानिक और वैधानिक आधार प्रदान करता है। अनुच्छेद 240 के तहत शक्ति का प्रयोग करने के लिए संसद के अवकाश में होने की शर्त नहीं है। यह संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत राष्ट्रपति के अध्यादेश से अलग है।
विनियमन कब से लागू होगा और इसका क्या महत्व है?
यह विनियमन एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा है जो लद्दाख में न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा। कानूनी सूत्रों के अनुसार, अनुच्छेद 240 के तहत विनियमन जारी करने से पहले संसद को स्थगित करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यह विनियमन एक विशिष्ट तिथि से लागू होगा। इस तिथि को लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक द्वारा एक आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से निर्दिष्ट किया जाएगा। यह कदम लद्दाख के लोगों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए दूर के स्थानों पर जाने की परेशानी से बचाएगा।

