नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने बीते दिनों तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया। इससे चल रही महाभियोग कार्यवाही के बीच उनके कार्यकाल का अचानक अंत हो गया। इस्तीफे की एक प्रति भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भी भेजी गई। पूरा मामला पिछले साल मार्च में सामने आया जब जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर कैश मिले थे।
कमेटी की मदद में शामिल दो वकीलों का दावा इसकी जांच जस्टिस अरविंद कुमार कमेटी ने किया। इस कमेटी की मदद कर रहे वकीलों ने पूरे मामले में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान पेश किए गए सबूत जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोप को साबित करने के लिए काफी थे। यह आरोप जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव में बताए गए आधारों में से एक था।
सीनियर वकील राजकुमार भास्कर ठाकरे और ऐश्वर्या भाटी ने क्या कहा
कमिटी को भेजे एक संदेश में, सीनियर वकील राजकुमार भास्कर ठाकरे और ऐश्वर्या भाटी- जिन्हें जजों की जांच कमेटी एक्ट के तहत पैनल की मदद के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने 9 अप्रैल को जस्टिस वर्मा के कार्यवाही से हटने वाले पत्र को प्रक्रियागत अन्याय की एक मनगढ़ंत कहानी बनाने की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा कि यह कोशिश तब की गई जब जज यशवंत वर्मा से आरोपों पर जवाब मांगा जा रहा था। उन्हें अच्छी तरह पता था कि इस्तीफा देने से यह कार्यवाही खत्म हो जाएगी। दोनों सीनियर वकीलों ने कहा कि जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ सबूतों से तीन आरोप साबित होते हैं।
पहला, सरकारी परिसर के अंदर बिना हिसाब वाली भारतीय करेंसी का मिलना और उसे अपने पास रखना
दूसरा, अहम सबूतों को सुरक्षित रखने में नाकाम रहना और उनमें दखल देना
तीसरा, टालमटोल वाले और गुमराह करने वाले स्पष्टीकरण/बयान देना।
जस्टिस वर्मा को लेकर किया ये दावा
सीनियर वकील राजकुमार भास्कर ठाकरे और ऐश्वर्या भाटी ने कमेटी से कहा कि उसे जस्टिस वर्मा के बेबुनियाद आरोपों को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि जब तक उन्होंने कार्रवाई से हटने का फैसला नहीं किया, तब तक उन्होंने किसी भी प्रक्रियागत गड़बड़ी की शिकायत नहीं की थी। खासकर तब, जब उनसे सबूतों का खंडन करने की उम्मीद की जा रही थी। उन्होंने आगे कहा कि कमेटी को इस तरह के कदम को एक असली शिकायत के तौर पर नहीं मानना चाहिए।
पैसे कहां से आए, जस्टिस वर्मा इसका जवाब देने की स्थिति में’
जस्टिस वर्मा ने कहा था कि उनसे एक ऐसा सवाल पूछा जा रहा जिसका जवाब देना नामुमकिन है। उनसे पूछा जा रहा कि यह पैसा आया कहां से? वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकरे और भाटी ने कहा कि जस्टिस वर्मा ही सबसे अच्छी स्थिति में थे यह बताने के लिए कि नई दिल्ली के लुटियंस जोन के बीचों-बीच स्थित उनके सरकारी बंगले के कैंपस में एक कमरे में बिना हिसाब वाले कैश के बंडल कैसे आ गए।
कई मुद्दों का जिक्र कर जज यशवंत वर्मा पर सवाल
जस्टिस वर्मा के इस आरोप को कि गवाहों को जानबूझकर एक ऐसी योजना के तहत हटाया गया जिससे उनके पक्ष में मौजूद सबूत दब जाएं, इसे दोनों ही वकीलों ने गलत और अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि कुछ गवाहों से पूछताछ न करने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज और मौखिक सबूत आरोपों को साबित करने के लिए पहले से ही काफी थे। उन्होंने कहा कि अगर जस्टिस वर्मा को सचमुच लगता था कि आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है, तो उन्हें क्लीन चिट पाने के लिए जांच की कार्रवाई जारी रखनी चाहिए थी।सीनियर वकील राजकुमार भास्कर ठाकरे और ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि जस्टिस वर्मा ने इन बातों पर कोई एतराज नहीं जताया कि उनके सरकारी आवास के स्टोररूम में कैश का होना; पिछले साल 14-15 मार्च की रात को, जब आग बुझाने वाली टीम वहां से चली गई थी, उसके बाद स्टोर रूम से जले हुए या आधे जले हुए कैश के बंडल हटाए जाना। आग बुझाने के काम के दौरान उनके परिवार के सदस्यों और निजी कर्मचारियों का वहां मौजूद होना और उस जगह पर उनका या उनके परिवार के सदस्यों का ही कंट्रोल होना।

