कर्नाटक : कर्नाटक सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद पैदा हुआ राजनीतिक विवाद अब कांग्रेस नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है। मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद से ही सरकार डैमेज कंट्रोल की कोशिश में जुट गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मंत्री प्रियांक खरगे के बयान भी सामने आए हैं। उन्होंने साफ किया है कि पार्टी इस मामले को बातचीत से सुलझा लेगी। कांग्रेस नेतृत्व अब इस पूरे विवाद को शांत करने में जुट गया है ताकि सरकार और संगठन दोनों पर इसका असर न पड़े।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने रामलिंगा रेड्डी को अपना करीबी दोस्त बताया। शिवकुमार ने कहा, “वह मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। कैबिनेट में हम सबसे करीबी दोस्तों में हैं। हम इस समस्या को सुलझा लेंगे।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रेड्डी की नाराजगी विभाग से जुड़ी है और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। उनके बयान को सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश माना जा रहा है।
प्रियांक खरगे ने विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने भी रामलिंगा रेड्डी के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि रेड्डी पार्टी और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण नेता हैं। प्रियांक खरगे ने भरोसा जताया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस पूरे मामले का हल निकाल लेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी में संवाद की परंपरा है और हर मुद्दे को बातचीत से सुलझाया जाता है। खरगे के बयान से यह साफ संकेत मिला कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी कीमत पर विवाद को बढ़ने नहीं देना चाहता।
क्या कांग्रेस सरकार पर बढ़ सकता है दबाव?
रामलिंगा रेड्डी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और उनका बंगलूरू की राजनीति में मजबूत प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनका इस्तीफा सरकार के लिए राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। विपक्ष पहले ही कांग्रेस सरकार पर अंदरूनी खींचतान के आरोप लगाता रहा है। अब इस विवाद ने उन चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार में सब कुछ नियंत्रण में है और किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है।
माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही रामलिंगा रेड्डी से बातचीत कर कोई समाधान निकाल सकता है। पार्टी फिलहाल किसी भी तरह का बड़ा राजनीतिक संदेश बाहर जाने से रोकना चाहती है। मुख्यमंत्री शिवकुमार और प्रियांक खरगे के बयानों से भी यही संकेत मिला है कि सरकार इस विवाद को जल्द खत्म करने के मूड में है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में रेड्डी को मनाने के लिए कांग्रेस क्या कदम उठाती है।

