नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज एक बार फिर दुनिया में अपना डंका बजा दिया है. बुधवार की सुबह श्रीहरिकोटा से भारत के सबसे ताकतवर रॉकेट LVM3-M6 ने ऐतिहासिक उड़ान भरी. इसने अमेरिकी कंपनी के ‘ब्लू बर्ड ब्लॉक-2’ सैटेलाइट को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचा दिया. यह इसरो के इतिहास का अब तक का सबसे भारी पेलोड (6100 किलोग्राम) था. इस शानदार कामयाबी के बाद इसरो के चीफ डॉ. वी. नारायणन ने News18 से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि यह जीत सिर्फ एक शुरुआत है. अगले साल तीन बड़े मिशन लॉन्च होने वाले हैं. साथ ही चंद्रयान-4 और 5 पर भी काम ‘फास्ट ट्रैक’ मोड में चल रहा है.
सक्सेस के बाद बोले डॉ. नारायणन- यह रॉकेट हमारा ‘मारुति’ है
लॉन्च के बाद डॉ. वी. नारायणन ने को बताया कि LVM3 रॉकेट इसरो के लिए मारुति जैसा भरोसेमंद है. उन्होंने कहा, ‘यह वही रॉकेट है जिसने चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 को लॉन्च किया था. आज इसने अपनी लगातार छठी सफल उड़ान भरी है.’ उन्होंने कहा कि जब कोई रॉकेट इतनी बार बिना गलती के सफल होता है तो उस पर भरोसा गहरा हो जाता है. यही वजह है कि गगनयान मिशन के लिए इसी रॉकेट को चुना गया है. आज की सफलता ने गगनयान के लिए रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है.
अगले साल होंगे 3 बड़े धमाके, इंसानों को भेजने से पहले कड़ी परीक्षा
- गगनयान मिशन पर अपडेट देते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते. 2027 में इंसानों को भेजने से पहले कड़े टेस्ट होंगे. उन्होंने बताया कि अगले साल हम 3 ‘अनक्रूड मिशन’ (मानवरहित) लॉन्च करने का टारगेट रख रहे हैं.
- इन मिशनों में रॉकेट और क्रू मॉड्यूल की सुरक्षा जांची जाएगी. पीएम मोदी के विजन के तहत इसरो पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है. जब ये तीनों टेस्ट सफल होंगे तभी भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में भेजा जाएगा.
- चंद्रयान-4 और 5 पर काम हुआ तेज, सरकार ने दी खुली छूट इसरो चीफ ने एक और बड़ी खुशखबरी दी. उन्होंने बताया कि सरकार ने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 को मंजूरी दे दी है. अब इन पर ‘फास्ट ट्रैक’ मोड में काम चल रहा है.
- उन्होंने कहा, ‘इसरो में हम कहते हैं कि कड़ी मेहनत का इनाम और ज्यादा काम है. सरकार ने हमें आम आदमी के लिए परफॉर्म करने का मौका दिया है.’ इसरो की लैब में वैज्ञानिक दिन-रात इन फ्यूचर मिशनों की तैयारी में जुटे हैं.
प्राइवेट कंपनियों का थामेंगे हाथ, स्पेस में अब स्टार्ट-अप्स मचाएंगे धूम
डॉ. नारायणन ने स्पेस सेक्टर में आ रहे बदलावों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि सरकार के रिफॉर्म्स के बाद अब स्टार्ट-अप्स भी ऑर्बिटल रॉकेट बना रहे हैं. इसरो इन नई कंपनियों की ‘हैंड-होल्डिंग’ कर रहा है. उन्हें तकनीक और गाइडेंस दी जा रही है. पहला प्राइवेट रॉकेट सामने आ चुका है. जल्द ही हम देखेंगे कि प्राइवेट कंपनियां अपने रॉकेट से सैटेलाइट्स लॉन्च कर रही हैं. यह भारत को ‘विकसित भारत 2047’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
स्पेस में पहुंचा 6 टन का ‘स्मार्टफोन टावर’, बिना डिश के चलेगा नेट
आज सुबह 8:54 बजे जब LVM3 रॉकेट ने उड़ान भरी तो पूरा देश गर्व से भर गया. 43.5 मीटर ऊंचे इस रॉकेट ने सिर्फ 15 मिनट में अपना काम पूरा कर दिया. इसने सैटेलाइट को 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया. यह सैटेलाइट कोई मामूली मशीन नहीं है. यह स्पेस में अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन एरे है. इसका साइज 223 वर्ग मीटर है. इसका मकसद जमीन पर मौजूद सामान्य स्मार्टफोन्स पर सीधे इंटरनेट पहुंचाना है.
अब पहाड़ों या समंदर के बीच भी नेटवर्क की दिक्कत नहीं होगी. अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile का यह प्रोजेक्ट दुनिया भर के 6 अरब मोबाइल यूजर्स को कनेक्ट करेगा. इसरो ने इस मिशन को न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की डील के तहत पूरा किया है.
क्या है ब्लू बर्ड सैटेलाइट की खासियत?
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम है जो स्पेस से सीधे आपके मोबाइल पर 5G नेट देगा. इसके लिए आपको अलग से डिश या एंटीना लगाने की जरूरत नहीं होगी. यह सैटेलाइट एक उड़ते हुए मोबाइल टावर की तरह काम करेगा. इसका एंटीना (एरे) इतना बड़ा है कि यह स्पेस से भी आपके फोन के छोटे सिग्नल को पकड़ सकता है. आज इसरो ने जिस सैटेलाइट को लॉन्च किया है, वह पुरानी सीरीज से 10 गुना ज्यादा ताकतवर है.

