नई दिल्ली।‘कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की तरफ से जारी ‘राष्ट्रीय श्रम एवं रोजगार नीति – श्रम शक्ति नीति 2025’ के मसौदे पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस नीति मसौदे में यह लिखा गया है कि श्रम नीति की प्रेरणा प्राचीन ग्रंथों जैसे मनुस्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति, नारदस्मृति, शुक्रनीति और अर्थशास्त्र से ली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुस्मृति ने भारत में जाति व्यवस्था और जातिवाद को जन्म दिया, इसलिए इसे नीति की नींव बताना संविधान के खिलाफ है। जयराम रमेश ने कहा, ‘मोदी सरकार का यह कहना कि श्रम शक्ति नीति संविधान से नहीं बल्कि मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से प्रेरित है, यह हमारे संविधान का अपमान है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।’
संविधान नहीं, मनुस्मृति से प्रेरणा- जयराम रमेश
जयराम रमेश ने कहा, ‘यह नीति अभी मसौदे के रूप में है, और मोदी सरकार ने इसे अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक सुझाव के लिए डाला है। लेकिन इस मसौदे में साफ लिखा है कि यह नीति मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से प्रेरणा लेती है। जब 1949 में हमारा संविधान लागू हुआ था, तब आरएसएस ने उस पर हमला किया था और कहा था कि यह ‘भारतीय संविधान’ नहीं है क्योंकि यह मनुस्मृति पर आधारित नहीं है। आज वही सोच फिर लौट आई है।’
जयराम रमेश ने कहा, ‘यह नीति अभी मसौदे के रूप में है, और मोदी सरकार ने इसे अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक सुझाव के लिए डाला है। लेकिन इस मसौदे में साफ लिखा है कि यह नीति मनुस्मृति जैसे ग्रंथों से प्रेरणा लेती है। जब 1949 में हमारा संविधान लागू हुआ था, तब आरएसएस ने उस पर हमला किया था और कहा था कि यह ‘भारतीय संविधान’ नहीं है क्योंकि यह मनुस्मृति पर आधारित नहीं है। आज वही सोच फिर लौट आई है।’

