तेहरान। ईरान में विरोध प्रदर्शन छठे दिन में प्रवेश कर गए हैं। कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन और गिरफ्तारियों की खबरें हैं। अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) ने बताया कि अब तक 10 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और दर्जनों को गिरफ्तार किया गया है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाते हैं तो अमेरिका दखल कर सकता है, इसके बाद ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का धन्यवाद किया और ईरानी जनता का समर्थन करने के लिए सराहना की।
पहलवी ने कहा कि ईरानी लोग इस शासन के 46 साल की अराजकता और आतंक के शासन को समाप्त करना चाहते हैं और क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए अमेरिका के साथ संबंध फिर से सुधारने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ट्रंप की चेतावनी ईरानी लोगों को ताकत और उम्मीद देती है और यह दिखाती है कि आखिरकार अमेरिका का राष्ट्रपति उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
पूर्व ईरानी महारानी फराह पहलवी ने भी प्रदर्शनों का समर्थन किया और सुरक्षा बलों से लोगों के आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने लिखा कि ईरान एक गौरवशाली इतिहास वाला देश है और भविष्य उनके साहस और संघर्ष का परिणाम होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये यह चेतावनी दी थी कि अगर ईरान शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वालों को मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है। उन्होंने लिखा, हम तैयार हैं और तत्पर हैं। इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद!
2022 में भी हुए थे व्यापक विरोध प्रदर्शन
इससे पहले साल 2022 में बड़े व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। उस समय एक 22 वर्षीय छात्रा महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में आक्रोश फैला और बड़े विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शन अभी उतने व्यापक और उग्र नहीं हुए हैं, जितने महसा अमीनी की मौत के बाद हुए थे। अमीनी को कथित तौर पर सही तरीके से हिजाब न पहनने के कारण हिरासत में लिया गया था।
इस बीच, अखिल भारतीय चिकित्सा छात्र संघ (एआईएमएसए) की विदेशी छात्र शाखा ने शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से दखल का आग्रह किया। संगठन ने कहा कि पश्चिम एशिया के इस देश में इस समय करीब तीन हजार भारतीय मेडिकल छात्र रह रहे हैं और कई शहरों में अशांति बढ़ती जा रही है।
विदेश मंत्री को लिखे पत्र में एआईएमएसए की जम्मू-कश्मीर इकाई के उपाध्यक्ष मोहम्मद मोमिन खान ने बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। पत्र में कहा गया, एआईएमएसए की ओर से मैं इस्लामी गणराज्य ईरान में मौजूदा हालात और वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे करीब तीन हजार भारतीय छात्रों की सुरक्षा और कल्याण को लेकर आपका तत्काल ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं।
पत्र में बताया गया कि मौजूदा हालात के कारण छात्र और उनके परिवार गंभीर चिंता में हैं। इसमें कहा गया, क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों और अनिश्चित माहौल को देखते हुए भारतीय मेडिकल छात्र और उनके परिवार भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ये छात्र ईरान के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं और स्थानीय सुविधा, छात्रावास और शिक्षण संस्थानों पर निर्भर हैं, जिससे अस्थिरता के समय वे ज्यादा असुरक्षित हो जाते हैं।
एआईएमएसए ने विदेश मंत्रालय से एहतियाती कदम उठाने की अपील की, जिसमें आपात हेल्पलाइन शुरू करना और जरूरत पड़ने पर निकासी योजना तैयार करना शामिल है। पत्र में कहा गया, एआईएमएसए भारत सरकार से विदेश मंत्रालय के माध्यम से विनम्र अनुरोध करता है कि वह स्थिति पर करीबी नजर रखे और ईरान में भारतीय मेडिकल छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा और लगातार संपर्क सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय और एहतियाती कदम उठाए।

