मुंबई : एक सियासी कहावत है कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता है, चाहे वह दोस्ती हो या दुश्मनी। महाराष्ट्र में ये कहावत भाजपा और कांग्रेस ने चरितार्थ कर दी है। महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने हाथ मिलाकर सियासी उथल-पुथल मचा दी है। कांग्रेस से गठबंधन कर भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता हासिल कर ली। भाजपा-कांग्रेस के इस सियासी खेल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ में हाशिए पर धकेल दिया है। चौंकाने वाली बात है कि भाजपा ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया है।
अंबरनाथ के निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच बना सियासी तालमेल इसलिए भी चौंकाने वाला है कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा कांग्रेस-मुक्त भारत की समर्थक है। वहीं, अंबरनाथ में इस गठबंधन से भाजपा की तेजश्री करंजुले को महापौर पद पर जीत हासिल हुई। गठबंधन को 32 पार्षदों का समर्थन मिला। इनमें भाजपा के 16, कांग्रेस के 12 और एनसीपी (अजित पवार गुट) के चार पार्षद शामिल थे।
एकनाथ शिंदे के बेटे ने दी प्रतिक्रिया
भाजपा की ओर से मिले इस झटके के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में काफी रोष नजर आ रहा है। इस मामले पर शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब भी उनके ही नेताओं को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और न ही इस पर शिवसेना को सफाई देने की जरूरत है।
भाजपा पर अपवित्र गठबंधन करने और धोखा देने का लगा आरोप
महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की सरकार में भाजपा के साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है। हालांकि, महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन है। इसके बावजूद अंबरनाथ में शिवसेना को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
शिंदे खेमे के विधायक बालाजी किनिकर ने इस गठबंधन को अपवित्र गठबंधन करार दिया और भाजपा पर विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘जिस पार्टी ने कांग्रेस-मुक्त भारत की बात की थी, वह अब कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में है। यह शिवसेना को पीठ में छुरा घोंपने के अलावा और कुछ नहीं है।’

