Ashwini Vaishnav: बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पप्पू यादव और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन में प्रश्नकाल के दौरान बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली और चुनावी समय में की जाने वाली घोषणाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब देश में 5 हजार ट्रेन और 23 हजार ही डिब्बे हैं तो चुनावी समय में हजारों ट्रेन चलाने की घोषणा क्यों की जाती है?पप्पू यादव ने कहा कि चुनाव आते ही पटरियों पर ट्रेनें कहां से आ जाती हैं? उन्होंने पूछा कि जब देश में नियमित ट्रेनों की भारी कमी है, आम आदमी को कन्फर्म टिकट के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता है। वेटिंग लिस्ट का भी बुरा हाल है, तो सरकार के पास चुनावी समय में अचानक सैकड़ों अतिरिक्त ट्रेनें कहां से आ जाती हैं? यादव ने कहा, “यह विडंबना है कि आम दिनों में रैक और इंजन की कमी का रोना रोया जाता है, लेकिन जैसे ही चुनाव आते हैं, बड़ी संख्या में नई ट्रेनें चलाने की घोषणाएं कर दी जाती हैं। हम यात्रियों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने में कई बार नाकामयाब होते हैं। जनता को यह बताया जाना चाहिए कि अगर गाड़ियां हैं, तो वे नियमित रूप से क्यों नहीं चलतीं? क्या यह केवल वोट बटोरने का एक चुनावी हथकंडा है?”
आंकड़ों पर राजनीति न करें-रेल मंत्री
पप्पू यादव के आरोपों का जवाब देने खुद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सदन में खड़े हो गए। उन्होंने पप्पू यादव को सलाह दी कि देश को गुमराह करने वाली राजनीति से बचें। अश्विनी वैष्णव ने कहा, “माननीय सांसद महोदय को यह समझना चाहिए कि रेलवे व्यवस्थित नेटवर्क है। हम मांग और सीजन के आधार पर विशेष ट्रेनें चलाते हैं जिससे त्योहारों और भारी भीड़ के समय यात्रियों को राहत मिल सके।”
उन्होंने कहा कि दीवाली और छठ के दौरान हमने देश में 12 हजार विशेष ट्रेनें चलाई। इसका आंकड़ा रेल मंत्रालय के वेबसाइट पर है। इसे चुनावी घोषणाओं से जोड़ना न केवल गलत है बल्कि सदन को गुमराह करने जैसा है। गलत आंकड़ें बताकर देश को गुमराह नहीं करना चाहिए। रेल मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेल की क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। नई पटरियों का बिछना और पुराने बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण रिकॉर्ड स्तर पर चल रहा है। हालांकि, पप्पू यादव उनके इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे।

