Kerosene Stove Prices Hike: दिल्ली में केरोसीन (मिट्टी के तेल) की वापसी की आहट ने बाजार का गणित बिगाड़ दिया है. अभी तेल की एक बूंद भी बाजार में नहीं आई है, लेकिन पुरानी यादों का हिस्सा बन चुके ‘स्टोव’ ने वापसी करते ही आम आदमी की जेब पर सीधा हमला बोला है. देश की राजधानी दिल्ली, जो कभी ‘केरोसीन मुक्त’ होने का गौरव हासिल कर चुकी थी, वहां आज हालात ने फिर से पुरानी यादें और पुराना ईंधन वापस ला दिया है. LPG सिलेंडरों की भारी किल्लत और लंबी कतारों ने सरकार को मजबूर कर दिया है कि वह फिर से राशन के जरिए मिट्टी का तेल बेचे. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि अभी डिपो से तेल की एक बूंद भी पेट्रोल पंपों तक नहीं पहुंची है, मगर दिल्ली के सदर बाजार में सालों से धूल फांक रहे ‘स्टोव’ अचानक काफी महंगे बिकने लगे हैं.
दिल्ली में इन दिनों गैस सिलेंडर (LPG) के लिए मची मारामारी के बीच सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सालों पहले ‘केरोसीन मुक्त’ घोषित हो चुकी दिल्ली में फिर से मिट्टी के तेल की बिक्री को मंजूरी दे दी गई है. लेकिन सरकार के इस फैसले का असर तेल से पहले चूल्हों (स्टोव) पर दिखने लगा है.
सदर बाजार में स्टोव खरीदने पहुंचे चाट विक्रेता पवन कुमार का दर्द पूरे हालात को बयां करता है. उन्होंने बताया, ‘अब तक सिलेंडर से काम चल जाता था, लेकिन अब जिनके पास कनेक्शन है, उन्हें भी सिलेंडर बड़ी मुश्किल से मिल रहा है. सोचा था कि स्टोव ले लूं, लेकिन यहां तो डेढ़-दो लीटर वाले छोटे स्टोव की कीमत 1600 रुपये मांगी जा रही है. जो सामान पहले 250 से 400 रुपये में आता था, उसे अब इतने ऊंचे दाम पर कौन खरीदेगा?’
9000 रुपये तक पहुंची स्टोव की कीमत
बाजार के व्यापारियों का भी मानना है कि कीमतों में यह उछाल ‘लूट’ जैसा है. सदर बाजार के व्यापारी मनजीत सिंह कहते हैं कि गरीब आदमी यहां सस्ते की उम्मीद में आता है, लेकिन फिलहाल बाजार में 1200 रुपये से लेकर 9000 रुपये तक के स्टोव बिक रहे हैं.
व्यापारियों के मुताबिक, 2013 के बाद दिल्ली में स्टोव की मांग खत्म हो गई थी और 2016 तक ज्यादातर दुकानदारों ने स्टोव छोड़कर गैस चूल्हे बेचना शुरू कर दिया था. अब अचानक आई डिमांड ने सप्लाई चेन को तोड़ दिया है.

