उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश में विधानसभा की करीब सौ सीटों पर प्रभावशाली उपस्थिति रखने वाले ब्राह्मण बिरादरी को साधे रखने के लिए भाजपा दूसरे दलों से आयातित नेताओं के भरोसे है। राज्य में 2022 में पहली बार अपनी सत्ता बरकरार रखने वाली भाजपा की सरकार में आठ ब्राह्मण मंत्रियों में से पांच दूसरे दलों से आयातित हैं। बीते लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से आए जितिन प्रसाद के केंद्र में मंत्री बनने के बाद रविवार को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में सपा से आए मनोज पांडे को योगी सरकार में जगह दी गई है।
योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं में सतीश चंद्र शर्मा, सुनील शर्मा और योगेंद्र उपाध्याय को ही मंत्रिमंडल में जगह मिली है। बीती सरकार में बेहद अहम ऊर्जा विभाग संभालने वाले श्रीकांत शर्मा को दूसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, जबकि डिप्टी सीएम रहे दिनेश शर्मा को राज्यसभा भेजा गया।
ऐसी रणनीति क्यों?
दरअसल, 10 से 13 फीसदी आबादी वाली ब्राह्मण बिरादरी का राज्य में मुख्य रूप से पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड में व्यापक उपस्थिति है। यह बिरादरी सौ से अधिक सीटों पर हार-जीत के निर्णय में अहम भूमिका निभाती है। बीते कई चुनावों में इस बिरादरी ने राज्य के चुनाव परिणाम को तय करने में अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में पार्टी की रणनीति अलग-अलग क्षेत्रों के बिरादरी के कद्दावर नेताओं को साधने की रही है।

