नई दिल्ली : मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि मनरेगा एक क्रांतिकारी कानून था। कांग्रेस के अनुसार, केंद्र सरकार जो नई योजना लाई है, उसने मनरेगा को खत्म कर दिया है और यह योजना एक गलती है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ठीक 20 साल पहले आज ही के दिन मनरेगा की शुरुआत हुई थी। इसे आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के बदनपल्ली गांव में लॉन्च किया गया था। रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पुरानी फोटो भी साझा की। इसमें बदनपल्ली की एक दलित महिला, चीमाला पेडक्का को दिखाया गया है, जो मनरेगा की पहली जॉब कार्ड धारक बनी थीं।
जयराम रमेश ने कहा कि इन 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण परिवारों, खासकर महिलाओं को 180 करोड़ दिनों का काम दिया है। इस योजना ने करीब दस करोड़ सामुदायिक संपत्तियां बनाईं और मजबूरी में होने वाले पलायन को काफी कम किया। इसने ग्राम पंचायतों को ताकत दी और ग्रामीण गरीबों की मजदूरी बढ़ाने में मदद की। उन्होंने याद दिलाया कि बैंक और पोस्ट ऑफिस खातों में सीधे पैसे भेजने (डीबीटी) की शुरुआत भी इसी योजना से हुई थी।
रमेश ने जोर देकर कहा कि मनरेगा केवल एक प्रशासनिक वादा नहीं था, बल्कि यह काम की कानूनी गारंटी थी। यह संविधान के अनुच्छेद 41 से मिला एक अधिकार था। इसमें नागरिक जब काम मांगते थे, तब उन्हें काम दिया जाता था। परियोजनाओं का फैसला स्थानीय ग्राम पंचायत करती थी। राज्य सरकार को कुल लागत का केवल दस प्रतिशत हिस्सा देना होता था, इसलिए राज्य बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के काम देने के लिए तैयार रहते थे। इसकी जांच ग्राम सभा और सीएजी नियमित रूप से करते थे।
कांग्रेस महासचिव ने किया दावा
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि मोदी सरकार का नया कानून सत्ता को केवल नई दिल्ली में समेटता है। अब सरकार तय करेगी कि किन जिलों में काम होगा। काम लोगों की मांग के बजाय सरकार के आवंटित बजट के हिसाब से मिलेगा। यह योजना हर साल खेती के व्यस्त समय में दो महीने के लिए पूरी तरह बंद रहेगी। इससे मजदूरों की मोलभाव करने की शक्ति खत्म हो जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि नई व्यवस्था में पंचायतों को किनारे कर दिया गया है। अब मोदी सरकार अपनी पसंद से प्रोजेक्ट तय करेगी। सबसे बड़ी समस्या यह है कि राज्यों को अब 40 प्रतिशत खर्च उठाना होगा। राज्यों की आर्थिक हालत देखते हुए वे इतना पैसा नहीं दे पाएंगे और धीरे-धीरे काम देना बंद कर देंगे।
बता दें कि केंद्र सरकार का ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025’ (VB-G RAM G) दिसंबर 2025 में पास हुआ था। नए कानून में काम की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। साथ ही इसमें फंडिंग पैटर्न, प्लानिंग सिस्टम और लागू करने के तरीकों में बदलाव किए गए। इस कानून पर विपक्षी पार्टियों ने तर्क दिया है कि नया कानून MGNREGA के अधिकार-आधारित स्वरूप को कमजोर करता है और सत्ता का केंद्रीकरण बढ़ाता है। यह कानून राज्यों पर ज्यादा वित्तीय जिम्मेदारियां डालता है, जिससे काम के मूल कानूनी अधिकार के कमजोर होने की संभावना है।