(अजय मेहरा)
नई दिल्ली। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने केंद्रीय बजट 2026–27 को कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी बताया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने पर बजट का फोकस विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है।
बजट में पशुपालन क्षेत्र के लिए 6,153.46 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 16% अधिक है। साथ ही 500 करोड़ रुपये की उद्यमिता विकास योजना शुरू की गई है, जिसके तहत सब्सिडी आधारित ऋण, आधुनिक डेयरी-पोल्ट्री ढांचा और पशुपालक उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा दिया जाएगा।
पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 20,000 नए पशु चिकित्सक व सहायक तैयार करने, नए वेटरनरी कॉलेज, अस्पताल, लैब और प्रजनन केंद्र स्थापित करने की योजना है। यह पहल देश के 53 करोड़ पशुधन को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
सहकारी संस्थाओं को राहत देते हुए पशु चारे की बिक्री पर भी टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे समितियों का कर बोझ घटेगा और किसानों को बेहतर भुगतान मिल सकेगा। सहकारी संस्थाओं के बीच डिविडेंड आय पर टैक्स छूट और राष्ट्रीय सहकारी संघों को तीन वर्ष की छूट का प्रावधान भी किया गया है।
बजट में डेयरी कचरे से बायो सीएनजी उत्पादन को बढ़ावा देने के कदम को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। डॉ. शाह ने कहा कि बजट कृषि और डेयरी क्षेत्र में निवेश, रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम है।
वहीं इंडियन पोटाश लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. पी एस गहलोत ने कहा, कि बजट में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों, जैसे डेयरी, पर खास ध्यान दिया गया है। इससे खेती में विविधता बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने की स्पष्ट दिशा मिलती है।
गहलोत ने आगे कहा कि फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए देश को खेती में मशीनों का ज्यादा उपयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है। इसी दिशा में भारत-विस्टार (Bharat-VISTAAR) नामक बहुभाषी AI टूल की घोषणा समयानुकूल कदम है। यह टूल एग्रीस्टैक पोर्टलों को आईसीएआर (ICAR) की बेहतरीन कृषि पद्धतियों से जोड़ेगा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों और फसलों में प्रिसिजन फार्मिंग तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। किसान बेहतर जानकारी के आधार पर सही निर्णय ले सकेंगे, जिससे पानी, उर्वरक और अन्य कृषि रसायनों का सही उपयोग होगा, फसल की पैदावार बढ़ेगी और पोषण गुणवत्ता भी सुधरेगी।
पशुपालन क्षेत्र के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रोग्राम की घोषणा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इससे गांवों के नए पशुपालकों को ताकत मिलेगी और ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में रोजगार के टिकाऊ अवसर पैदा होंगे।
