Union Budget 2026: केंद्र सरकार का आम बजट 2026 अगले महीने फरवरी में पेश किया जाएगा। इससे पहले कांग्रेस ने उम्मीद जताई कि आने वाला केंद्रीय बजट में सुस्त प्राइवेट कॉर्पोरेट निवेश और आय में असमानताओं की चुनौतियों से निपटने के लिए सार्थक कदम उठाए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि घरेलू बचत दरें काफी कम हो गई हैं, और धन, आय व उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं।
अपने एक्स पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा, ‘संसद के आगामी सत्र का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026/27 का बजट अब से बीस दिन बाद पेश किया जाएगा। यह बजट निस्संदेह 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को प्रतिबिंबित करेगा, जिसने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ये सिफारिशें 2026/27 से 2031/32 की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र व राज्यों के बीच कर राजस्व के बँटवारे तथा राज्यों के बीच इन राजस्व के वितरण से संबंधित हैं।’
तीन सबसे प्रमुख चुनौतियां गिनाईं
उन्होंने आगे कहा कि मनरेगा को बुलडोजर से खत्म करने वाले नए कानून में लागू किए गए 60:40 लागत को साझा करने के फॉर्मूले से पहले ही बेहद चिंतित राज्य सरकारें अब निश्चित रूप से और भी अधिक आशंका में उंगलियाँ क्रॉस किए बैठी होंगी। अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफ़े के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं। दूसरा, घरेलू बचत दरों में काफ़ी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है। तीसरा, संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।

